Farmers Sensitized on Stubble Management : अमृतसर। गांव बल्ल कलां में कृषि विभाग की ओर से धान की पराली के उचित प्रबंधन को लेकर किसान जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। अधिकारियों ने किसानों को पराली न जलाने और आधुनिक कृषि मशीनरी व तकनीकों के माध्यम से वैज्ञानिक ढंग से इसका प्रबंधन करने की जानकारी दी। साथ ही पराली जलाने से मिट्टी, हवा और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से भी अवगत करवाया।
यह शिविर कृषि विस्तार अधिकारी मनदीप सिंह, सर्कल मूधल के प्रयासों से लगाया गया। शिविर के दौरान किसानों को धान की पराली न जलाने तथा उपलब्ध आधुनिक कृषि मशीनरी का उपयोग करके पराली का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन करने संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि अधिकारियों ने पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता को होने वाले नुकसान तथा हवा, पानी और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया।
अधिकारियों ने बताया कि पराली को खेतों में मिलाकर अथवा उपलब्ध कृषि मशीनरी के माध्यम से इसका उचित प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाने और मिट्टी की सेहत को बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके साथ ही पराली जलाने से उत्पन्न धुएं और प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि पराली को आग लगाने के बजाय कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही आधुनिक कृषि मशीनरी एवं तकनीकों का लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि पराली का उचित प्रबंधन केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ही महत्वपूर्ण कदम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की उर्वरता और कृषि की स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। शिविर के दौरान किसानों ने पराली प्रबंधन से संबंधित अपने सवाल भी साझा किए, जिनका कृषि विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक जवाब दिया गया तथा वैज्ञानिक ढंग से पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।

