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पराली के गट्ठर बनाकर खेतों में उगाईं सब्जियां, किसानों ने पेश की मिसाल

Farmers Turn Stubble into an Opportunity, Grow Vegetables : अमृतसर। तरनतारन जिले के भरोवाल गांव के किसानों ने पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीक अपनाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती में अतिरिक्त लाभ का रास्ता दिखाया है। किसानों ने एक्स-सिटू तकनीक से पराली के गट्ठर तैयार किए और खेतों में मटर, बीन्स व फूलगोभी जैसी सब्जियों की खेती शुरू की। एसडीएम संजीव कुमार शर्मा ने किसानों की पहल की सराहना करते हुए अन्य किसानों से भी पराली न जलाने और इन-सिटू व एक्स-सिटू तकनीकों को अपनाने की अपील की।

इस पहल के तहत जिसका उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करना है—खादूर साहिब के उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) संजीव कुमार शर्मा और क्लस्टर अधिकारी डॉ. यादविंदर सिंह ने भरोवाल गांव के उन किसानों से मुलाकात की, जो पराली प्रबंधन के काम में सक्रिय रूप से जुटे हैं। इस मौके पर किसान नवप्रीत सिंह, यादविंदर सिंह, बलदेव सिंह और गुरविंदर सिंह मौजूद थे। किसानों ने बताया कि उन्होंने ‘एक्स-सिटू’ तकनीक का इस्तेमाल करके फसल अवशेषों (पराली) के गट्ठर बनाए हैं।

अपने खेतों में इन अवशेषों का सही प्रबंधन करने के बाद, उन्होंने मटर, बीन्स और फूलगोभी जैसी सब्जियों की खेती की है। इस अवसर पर, SDM संजीव कुमार शर्मा ने किसानों की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि भरोवाल गांव के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि फसल अवशेष कोई बोझ नहीं हैं; बल्कि, सही प्रबंधन के जरिए ये खेती के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। फसल अवशेषों को जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को भी नुकसान पहुंचता है और लाभदायक कीड़े-मकोड़े भी खत्म हो जाते हैं।

उन्होंने खादूर साहिब उप-मंडल के सभी किसानों से अपील की कि वे पराली को जलाने के बजाय ‘एक्स-सिटू’ या ‘इन-सिटू’ (खेत के अंदर) तकनीकों का उपयोग करके उसका सही प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग और जिला प्रशासन किसानों को हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। खादूर साहिब के क्लस्टर अधिकारी डॉ. यादविंदर सिंह ने किसानों को एक स्पष्ट संदेश दिया। फसल अवशेषों (पराली) को जलाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। आइए, हम सब मिलकर फसल अवशेषों का सही ढंग से प्रबंधन करें, अपनी मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें और तरनतारन जिले को पराली जलाने की समस्या से मुक्त बनाने में अपना योगदान दें।

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