Punjab : बाढ़ से पीड़ित परिवारों के बच्चों को शिविर में ही शिक्षा देने वाला सीमावर्ती जिला फिरोजपुर राज्य का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां बाढ़ पीड़ित बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। गौरतलब है कि राज्य में बाढ़ के संकट के बाद सरकार द्वारा स्कूल बंद करने के आदेशों के बाद फिरोजपुर?के?बाढ़ पीढ़ितों को शरण देने के लिए बनाए केन्द्रों में बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए कक्षाएं शुरू की गई है। कक्षाए शुरू करने का उद्देश्य बच्चो को खेल-खेल में ज्ञान प्रदान करना है।?डिप्टी डीईओ डा. सतिंदर सिंह ने बताया कि सीमावर्ती गांव बारेके में चल रहे राहत केन्द्र में आंगनबाड़ी वर्करों द्वारा 2 से 6 वर्ष के बच्चों की तथा शिक्षा विभाग द्वारा 10 से 20 वर्ष तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं चलाई जा रही है। जिला शिक्षा विभाग की और से डीसी दीपशिखा की सलाह और उनके निर्देश पर ही इस पहल की बच्चो के माता पिता जमकर तारीफ कर रहे हैं।
बच्चों को स्कूल जैसा माहौल मुहैया करवाया जा रहा : जिला प्रोग्राम अधिकारी नंदा
जिला प्रोग्राम अधिकारी ऋचिका नंदा ने बताया कि बाढ़ के बाद जिले में चार स्थानों पर इस तरह के केन्द्र चल रहे हैं, जिसमें गांव बारेके, फतेहगढ़ सभरां, दुलचीके, बगेवाला शामिल है। इन केन्द्रो पर जो बाढ़ प्रभावित लोगो ने शरण ले रखी है, उनके 80 से ज्यादा बच्चों को एकत्रित किया जाता है और उनकी रोजाना सुबह-शाम क्लॉस लगाई जाती है। उन्होंने कहाकि सुबह 9:30 से 12:30 तथा शाम को एक घंटा बच्चों को एक कमरे में एकत्रित करके उन्हें ड्राइंग, गेम्स, कविता, सांग एक्टिविटी करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान बच्चो के जलपान का विशेष प्रबंध करने के अलावा उनके लिए झूलो की विशेष व्यवस्था है।?इन केन्द्रो पर 2 आंगनवाड़ी वर्कर, दो हैल्पर, सहित सुपरवाइजर तैनात कर रखे है। 2 से अढ़ाई वर्ष के बच्चों के साथ उनकी माताएं भी आ रही हैं और मदर फीड के लिए भी विशेष बूथ बनाए गए हैं।
ड्राइंग, कंप्यूटर, मैथ जैसे विषय पढ़ाए जा रहे : अध्यापिका रजनी खुराना
सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल गांव बारेके की अध्यापिका रजनी खुराना ने बताया कि उनके स्कूल में इन दिनों 42 बच्चे रोजाना क्लॉस में आ रहे हैं और ये बच्चे बाढ़ प्रभावित गांवों के हैं और इनके अभिभावको ने स्कूल में ही शरण ले रखी है। एक दिन इन्हें ड्राइंग और कंप्यूटर, मैथ व इंगलिश, हिन्दी व पंजाबी, साइंस व सामाजिक जैसे विषय पढ़ाए जा रहे है। 9वीं कक्षा की 15 वर्षीय अमनदीप कौर निवासी गांव टेंडीवाला ने कहा कि स्कूल में आकर वह काफी खुश है और उनकी पढ़ाई भी चल रही है। कक्षा दसवीं की पिंकी ने कहा कि ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि राहत केन्द्रो में इस तरह कक्षाए लगाकर उन्हें व्यस्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण परिवारिक सदस्यों के चेहरों पर चिंता के शिकन हैं, लेकिन स्कूल में आकर उनका माइंड चेंज होता है।

