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जानें कौन थे जसवंत सिंह खालरा, जिनकी जिंदगी पर आधारित है फिल्म Satluj

Jaswant Singh Khalra

Jaswant Singh Khalra

Jaswant Singh Khalra: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ कई वर्षों तक सेंसर और सर्टिफिकेशन से जुड़े विवादों का सामना करने के बाद फिल्म को हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था। हालांकि, रिलीज के केवल दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। अब दर्शक इसके दोबारा स्ट्रीम होने का इंतजार कर रहे हैं। यह फिल्म पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। आइए जानते हैं कि आखिर वे कौन थे और क्यों उनका नाम आज भी चर्चा में रहता है।

कौन थे जसवंत सिंह खालरा?

जसवंत सिंह खालरा का जन्म वर्ष 1952 में पंजाब के अमृतसर जिले के खालरा गांव में हुआ था। शुरुआती दौर में उन्होंने बैंक कर्मचारी के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने मानवाधिकारों के लिए आवाज उठानी शुरू की और इसी काम ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। बताया जाता है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख विरोधी दंगों जैसी घटनाओं ने उनके जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव डाला। इसके बाद उन्होंने पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच शुरू की। उस समय पंजाब में उग्रवाद का दौर चल रहा था। कई परिवारों का आरोप था कि उनके परिजनों को पुलिस पूछताछ के लिए ले गई, लेकिन वे कभी वापस नहीं लौटे। ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने पर जसवंत सिंह खालरा ने खुद जांच शुरू की, जांच के दौरान उन्हें अमृतसर नगर निगम के ऐसे रिकॉर्ड मिले, जिनमें हजारों लोगों के नाम, उम्र और पते दर्ज थे। आरोप था कि इन लोगों की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी और उनके शवों का अंतिम संस्कार परिवारों को बिना जानकारी दिए गुप्त रूप से कर दिया गया था। उनकी इस जांच ने पूरे देश और विदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद वे पंजाब के सबसे प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में गिने जाने लगे।

1995 में खुद हो गए लापता

सितंबर 1995 में जसवंत सिंह खालरा अचानक लापता हो गए। बताया जाता है कि आखिरी बार उन्हें अपने घर के बाहर कार साफ करते हुए देखा गया था। बाद में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने की। जांच में ऐसे सबूत मिलने की बात सामने आई, जिनसे संकेत मिला कि उन्हें तरनतारन के एक पुलिस थाने में हिरासत में रखा गया था। इसके बाद सीबीआई ने उनके अपहरण और हत्या के मामले में पंजाब पुलिस के नौ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की।

अदालत का फैसला

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 16 अक्टूबर 2007 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने चार दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। इनमें पूर्व सब-इंस्पेक्टर सतनाम सिंह, सुरिंदर पाल सिंह, जसबीर सिंह और पूर्व हेड कॉन्स्टेबल पृथ्वीपाल सिंह शामिल थे, जसवंत सिंह खालरा के परिवार में उनकी पत्नी परमजीत कौर खालरा, बेटी नवकिरण कौर और बेटे जनमीत सिंह हैं।

रिलीज के दो दिन बाद हटाई गई ‘सतलुज’

कई सालों तक सर्टिफिकेशन और कानूनी अड़चनों का सामना करने के बाद ‘सतलुज’ को ओटीटी पर रिलीज किया गया था। लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। फिल्म हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर दर्शकों ने निराशा जाहिर की। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला और इसके लिए सभी का धन्यवाद। साथ ही यह भी कहा गया कि प्लेटफॉर्म फिल्म, उसके निर्देशक और उनकी रचनात्मक सोच के साथ खड़ा है तथा भारतीय दर्शकों के लिए फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के कानूनी विकल्पों पर काम किया जा रहा है।

फिल्म की स्टार कास्ट

निर्देशक हनी त्रेहान की इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यन ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म की रिलीज के साथ यह माना जा रहा था कि वर्षों से चला आ रहा सर्टिफिकेशन विवाद समाप्त हो गया है, लेकिन ओटीटी से अचानक हटाए जाने के बाद यह फिल्म एक बार फिर चर्चा और विवाद का विषय बन गई है।

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