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श्री मुक्तसर साहिब में धान की पराली प्रबंधन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कोर्स हुआ संपन्न

श्री मुक्तसर साहिब: पीएयू-कृषि विज्ञान केंद्र, श्री मुक्तसर साहिब की ओर से धान की पराली के उचित प्रबंधन को लेकर 1 से 8 अक्टूबर 2026 तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कोर्स का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के 25 जागरूक किसानों ने भाग लिया। कोर्स के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन, आधुनिक कृषि मशीनरी, गेहूं की सफल खेती और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

किसानों को पराली प्रबंधन के लिए किया प्रेरित

प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. करमजीत शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर (ट्रेनिंग) ने कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से पराली प्रबंधन के लिए चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की।

उन्होंने किसानों को पराली का उचित प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से जिले के विभिन्न गांवों में पराली प्रबंधन से संबंधित मशीनरी उचित दरों पर उपलब्ध करवाई जाती है। किसानों को इन सुविधाओं का लाभ उठाकर पराली को जलाने के बजाय उसका सही उपयोग करना चाहिए।

आधुनिक मशीनों और गेहूं की उन्नत किस्मों की दी जानकारी

डॉ. विवेक कुमार, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने किसानों को विश्वविद्यालय की ओर से अनुशंसित पराली प्रबंधन मशीनों और उनके उचित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने रबी की फसलों की उन्नत किस्मों और पराली वाले खेतों में गेहूं की सफल खेती करने की तकनीकों की जानकारी दी। इसके साथ ही खेतों से बाहर निकाली गई पराली का कृषि कार्यों में प्रभावी ढंग से उपयोग करने के तरीकों पर भी चर्चा की।

पराली जलाने के नुकसान और मिट्टी की सेहत पर जोर

डॉ. जगमंजोत सिंह मान, सहायक प्रोफेसर (मृदा विज्ञान) ने पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में किसानों को जागरूक किया। उन्होंने पराली के उचित प्रबंधन के विभिन्न तरीकों की जानकारी देते हुए बताया कि पराली का सही उपयोग मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बागवानी और मशरूम उत्पादन में भी उपयोगी है पराली

डॉ. सुखजिंदर सिंह, सहायक प्रोफेसर (फल विज्ञान) ने किसानों को बागवानी फसलों में पराली के उचित उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मशरूम उत्पादन में पराली के प्रभावी इस्तेमाल से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बताया गया कि पराली केवल फसल अवशेष नहीं है, बल्कि इसका उचित इस्तेमाल कृषि और अन्य संबंधित गतिविधियों में किया जा सकता है।

सहायक व्यवसाय अपनाकर बढ़ाई जा सकती है किसानों की आय

डॉ. गुरविंदर सिंह, सहायक प्रोफेसर (प्रसार शिक्षा) ने प्रशिक्षण कोर्स के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने किसानों को खेती के साथ सहायक व्यवसाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से विभिन्न सहायक व्यवसायों के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। किसान इन व्यवसायों को अपनाकर अपनी आमदनी में अच्छी वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने केंद्र की ओर से किसानों को उपलब्ध करवाई जाने वाली अन्य सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी।

पराली प्रबंधन से पर्यावरण और खेती को होगा लाभ

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से रोकना, फसल अवशेषों का उचित उपयोग सिखाना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती के साथ अतिरिक्त आय के साधन विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

📍 Location: Shri muktsar sahib (Shri muktsar sahib)

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