Site icon Dainik Savera Times

साहिबजादों की याद में सुल्तानपुर लोधी में वन रोपण की शुरुआत, संत सीचेवाल बोले-बनाएंगे देश का खूबसूरत शहर

सुल्तानपुर लोधी: चारों साहिबजादों व माता गुजरी जी की याद को समर्पित पर्यावरणविद् व राज्य सभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में सुल्तानपुर लोधी में वन रोपण का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर नगर परिषद अध्यक्ष दीपक धीर व पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार मोगला, पार्षदों, बच्चों व अन्य समाजसेवियों ने एक घंटे के अंदर 300 से अधिक पौधे लगाए।

पौधरोपण शुरू करने से पहले साहिबजादे और माता गुजरी जी की याद में समर्पित निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी गुरुद्वारा गुरप्रकाश में श्री अखंड पाठ साहिब का भोग पाया गया और बच्चों द्वारा कीर्तन किया गया| इसके बाद संत सीचेवाल ने कथा सुनाई। संत सीचेवाल ने चारों साहिबजादों और माता गुजरी को याद किया और कहा कि उनका बलिदान देश के लिए शेष विश्व के लिए एक मार्ग बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि बाबा नानक की नगरी सुल्तानापुर लोधी को इंदौर शहर की तरह देश का सुंदर शहर बनाया जाएगा। शहर के 13 वार्डों में गीला व सूखा कचरा अलग करने के लिए नगर परिषद के सहयोग से डस्टबीन की व्यवस्था की जाएगी। जिसकी शुरुआत 30 दिसंबर को नगर परिषद अध्यक्ष दीपक धीर के वार्ड नंबर 8 से की जाएगी। उन्होंने कहा कि गुरु की नगरी सुल्तानपुर लोधी जैसी भूमि का निवासी होना गर्व की बात है। उन्होंने सभी से अपनी जिम्मेदारी को समझने और निभाने की अपील की।

इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष दीपक धीर ने आश्वासन दिया कि शहर में गीले और सूखे कचरे को अलग करने की परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा और पुराने ठोस कचरे को खत्म किया जाएगा। उन्होंने राज्य सभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से अनुरोध किया कि स्मार्ट सिटी के लिए केंद्र सरकार से राशि दिलाने में मदद करें। आम आदमी पार्टी के विधानसभा क्षेत्र प्रभारी सज्जन सिंह चीमा ने कहा कि 1982 में वे इंदौर खेलने गए थे, तब देश के गंदे शहरों में शामिल थे, लेकिन अब उनकी मिसाल देश में स्वच्छ शहरों के लिए दी जा रही है। उन्होंने पार्टी स्तर से ऊपर उठकर सुल्तानपुर लोधी को हरा भरा बनाने के लिए सहयोग करने का आह्वान किया। संत सीचेवाल ने कहा कि सीचेवाल की नर्सरी से पंजाब के अलग-अलग इलाकों में जंगल लगाने के लिए मुफ्त पौधे मुहैया करवाए जाएंगे। यह जंगल सुल्तानपुर लोधी के रेलवे स्टेशन के पास लगाया गया था जिसमें सुखचैन के पौधे लगाए गए थे।

Exit mobile version