बठिंडा: आटोमैटड टेस्टिंग स्टेशन का ठेका दिलवाने के नाम पर एक व्यक्ति से 30 लाख रुपए की ठगी मारने वाले 3 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले में कोतवाली पुलिस थाना के आरोपी लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है जबकि किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस संबंध में एस.एस.पी. बठिंडा के पास 4 जून 2025 को दीपक बांसल वासी अमरिक सिंह रोड़ ने शिकायत दी थी कि अमित बसंल निवासी मकान संख्या 14222, गली नंबर 4 ए, गणोशा बस्ती, बठिंडा, कांता बंसल निवासी गणोशा बस्ती, बठिंडा, नरिंदर कुमार गर्ग, चार्टर्ड अकाउंटैंट, मकान नंबर 257, वीर कॉलोनी बठिंडा ने मिलकर करीब 30 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है।
इसमें आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के लिए टैंडर प्राप्त करने हेतु नकली और जाली नेटवर्थ सर्टिफिकेट तैयार करने के साथ उसका उपयोग किया गया। यह टैंडर पंजाब सरकार ने बठिंडा में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन खोलने के लिए जारी किया था। इसमें आरोपी अमित बांसल शिकायतकर्ता दीपक कुमार और हरीश कुमार को पहले से जानता थे। उसने प्रलोभन दिया कि अगर वह टैंडर भर देगा तो उसे काफी आर्थिक लाभ होगा। इस दौरान शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि उन्हें टैंडर भरने और काम के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो आरोपी ने कहा कि वह सब कुछ खुद करेंगे लेकिन इसके लिए हमें उसकी माँ के नाम पर परिवहन विभाग को 5 लाख रुपए सरकारी शुल्क और 25 लाख रुपए बैंक गारंटी के रूप में देने होंगे।
उसने आश्वासन दिया कि कुछ भी गलत नहीं होगा और हमें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह अपनी माँ की सहमति से उनके नाम पर यह काम करेगा। यह तय हुआ कि अगर टेंडर मिल जाता है, तो उसे आय का 5 फीसदी दिया जाएगा और बाकी हिस्सा हम दोनों के बीच बांट दिया जाएगा। जब हमने इस संबंध में तीनों आरोपी लोगों से बात की व उन्होंने हमे पैसा देने पर लाभ का आश्वासन दिया। टैंडर आरोपी अमित बांसल की मां की फर्म बांसल सेल्स कॉरपोरेशन को आवंटित हो गया। इसमें आरोपी लोगों ने अपनी मां के साथ मिलीभगत करके हमें धोखा देने की नीयत से अपने वादे से मुकर गए और हमारे साथ किसी भी तरह का साङोदारी समझौता करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि वह आपको धोखा दे चुके हैं, अब न तो आपके पैसे वापस करेंगे और न ही इस काम में आपको कोई हिस्सा दिया जाएगा। आरोपी लोगों ने अपने रिश्तेदार नरिंदर कुमार गर्ग, जो पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है, के साथ मिलीभगत करके 3 करोड़ रुपए से अधिक का फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट तैयार किया है। इस प्रकार सभी आरोपियों ने आपस में मिलीभगत करके शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की है। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है वही आरोपी लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है।
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