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ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने संभाली तख़्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार के तौर पर सेवा

March 10, 2025

ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने संभाली तख़्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार के तौर पर सेवा

Giani Kuldeep Singh Gadgaj : तख्त श्री केसगढ़ साहिब के नवनियुक्त जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने आज प्रातः तख्त साहिब के पंज प्यारे साहिबानों की उपस्थिति में जत्थेदार का पदभार ग्रहण किया। सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह सुबह तख्त श्री केशगढ़ साहिब पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने तख्त साहिब में माथा टेका।

उनकी सेवा से पहले तख्त श्री केसगढ़ साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी जोगिंदर सिंह ने अरदास की और उसके बाद पंज प्यारे साहिबानों ने सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह को पगड़ी भेंट की। इस अवसर पर सचिव प्रताप सिंह और तख्त साहिब के मैनेजर मलकीत सिंह ने भी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से पगड़ी भेंट की। इस बीच तख्त साहिब में ग्रंथी सिंहों ने सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह को सिरोपा भी भेंट किया।

साधारण सिख परिवार में जन्म लेकर मिली इतनी बड़ी सेवा-
इस बीच, सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह ने मौजूदा पंथक हालात को देखते हुए पूरे सिख जगत से एक झंडे तले एकजुट होने की अपील की। उन्होंने पंथ की ओर से तख्त साहिब की देखभाल करने का सम्मान प्रदान करने के लिए दस पातशाहियों और गुरु ग्रंथ साहिब को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें एक साधारण सिख परिवार में जन्म लेकर इतनी बड़ी सेवा मिली है।

गुरु पर विश्वास रखते हुए एकजुट होने की आवश्यकता-
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना जीवन एक पाठी सिंह के रूप में शुरू किया और फिर धार्मिक प्रचार की सेवा को चुना तथा वे एक प्रचारक के रूप में गुरु पंथ की सेवा करते रहेंगे। पंथ के सामने मौजूद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बात करते हुए ज्ञानी कुलदीप सिंह ने कहा कि हमारे अधिकांश मुद्दे गुरु की परंपरा से अलग होने के कारण उत्पन्न हुए हैं। यह चिंता का विषय है कि आज सिखों में धार्मिक मतभेद का माहौल है। हमारे बीच गुटीय विभाजन और वैचारिक मतभेदों ने बड़े विभाजन पैदा कर दिए हैं। धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर सक्षम नेतृत्व के अभाव के कारण, मुद्दों को सुलझाने के लिए एक साथ आने के बजाय, एक-दूसरे को छोटा दिखाने की प्रवृत्ति है। ऐसे कठिन समय में, गुरु पर विश्वास रखते हुए एकजुट होने के अवसर पैदा करने की आवश्यकता है।

अल्पसंख्यकों में डर का माहौल-
उन्होंने कहा कि राजनीतिक तौर पर सिख समुदाय बड़े हमलों का शिकार है, जहां एक तरफ देश में अल्पसंख्यकों में डर का माहौल पैदा किया गया है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करके सिखों के खिलाफ यूएपीए और एनएसए जैसी काले कानून और धाराएं लगाई गई हैं और युवाओं को लंबे समय से जेलों में रखा गया है। देश के शासक 1984 के सिख नरसंहार के 40 साल बाद भी न्याय दिलाने में विफल रहे हैं। सिख राजनीतिक सत्ता के बिखराव के कारण दशकों से जेलों में बंद सिख कैदियों को कोई जमानत नहीं मिल रही है, बल्कि हर दिन किसी झूठे सिख विरोधी डेरेदार को लंबी छुट्टियां देकर सिखों को परेशान किया जा रहा है।

सिखों को अल्पसंख्यक बनाने की गहरी साजिश-
ज्ञानी कुलदीप सिंह ने कहा कि पंजाब की सिख आबादी को यहां से पलायन करने पर मजबूर किया जा रहा है और बदले में बड़ी संख्या में गैर पंजाबी आबादी को बसाकर पंजाब में सिखों को अल्पसंख्यक बनाने की गहरी साजिश चल रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के नेताओं को डेरे या अप्रवासियों से मिलने वाले चंद हज़ार वोटों की चिंता है, लेकिन वे यहाँ रहने वाले लाखों सिखों के वोटों की गिनती नहीं करते। इसका मुख्य कारण यह है कि हम बहुत बुरी तरह से बंटे हुए हैं।

नशे और धर्म परिवर्तन पर गहरी चिंता व्यक्त की-
ज्ञानी कुलदीप सिंह ने कहा कि सामाजिक दृष्टि से आज सिख समाज अनेक गंभीर बीमारियों का शिकार हो चुका है, जिसमें हमारे युवा नशे के आत्मघाती रास्ते पर जाने के कारण मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई सरकारें बदल चुकी हैं, लेकिन नशे का प्रचलन रुकने की बजाय लगातार बढ़ रहा है और हजारों नौजवान लड़के-लड़कियां इसकी चपेट में आकर मर चुके हैं। भौतिकवाद और धर्म से त्रस्त समाज में ऐसी बुराइयाँ पनपने लगती हैं, जिनका एकमात्र इलाज धर्म ही है। ज्ञानी कुलदीप सिंह ने धर्म परिवर्तन पर भी गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए जमीनी स्तर पर एक प्रभावी धर्म प्रचार आंदोलन की आवश्यकता है, जिसे वह सिख संतों, महापुरुषों, संप्रदायों, बुद्धिजीवियों और विद्वानों की मदद से प्राथमिकता के आधार पर शुरू करेंगे।

युवाओं से पगड़ी पहनकर श्री आनंदपुर साहिब आने का किया आग्रह-
अंत में, होला मोहल्ला के अनोखे त्योहार पर सिख समुदाय को बधाई देते हुए जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सिख युवाओं को गुरु के प्यार में सराबोर होकर होला मोहल्ला की खुशी बढ़ाने और खालसा की पवित्र धरती पर आकर सिख धर्म के उत्साह और जोश के साथ इस त्योहार को मनाने का निमंत्रण दिया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस विशेष अवसर पर रुमाल आदि बांधने की बजाय पगड़ी पहनकर श्री आनंदपुर साहिब की ओर चलें। ज्ञानी कुलदीप सिंह ने सभी संगठनों, दल पंथ, टकसाल और सिख नेताओं से सहयोग की अपेक्षा की। इस अवसर पर शिरोमणि कमेटी के उप सचिव श्री. गुरचरण सिंह कुहाला, मुख्य गुरुद्वारा इंस्पेक्टर एस. जगदीश सिंह बुट्टर, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के अतिरिक्त मैनेजर हरदेव सिंह आदि उपस्थित थे।

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