Last Updated: October 22, 2026

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सरकारी बसों के पहिए थमे; बस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा

October 22, 2026

सरकारी बसों के पहिए थमे; बस स्टैंड पर पसरा सन्नाटा

बठिंडा : पंजाब भर में 21 अक्तूबर से शुरू हुई सरकारी कर्मचारियों और परिवहन कर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल का व्यापक असर बठिंडा जिले में भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के संविदा कर्मियों के चक्का जाम और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के सामूहिक आकस्मिक अवकाश (मास कैजुअल लीव) पर चले जाने के कारण मालवा क्षेत्र के प्रमुख केंद्र बठिंडा में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

बठिंडा बस स्टैंड पर सुबह से ही सरकारी बसों के पहिए पूरी तरह थमे रहे। पीआरटीसी और पनबस की करीब सभी अनुबंधित बसें डिपो के भीतर खड़ी कर दी गईं, जिससे चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला और फिरोजपुर जैसे प्रमुख रूटों पर जाने वाले दैनिक यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी। त्यौहारों के मौसम और सामान्य कार्यदिवस के बीच अचानक हुए इस चक्का जाम से दफ्तर जाने वाले लोग, कॉलेज के छात्र और मरीज बस अड्डों पर घंटों भटकते दिखे।

 

सरकारी बसों के न चलने का सीधा फायदा निजी बस ऑपरेटरों ने उठाया, जहां सीमित सीटों के चलते यात्रियों से अधिक किराया वसूलने और बसों में अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आईं। बठिंडा डिपो के बाहर एकत्र हुए पनबस और पीआरटीसी के संविदा कर्मचारियों ने पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना दिया। यूनियन नेताओं ने दो टूक कहा कि वर्षों से वे अल्प वेतन पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।

कर्मचारी तालमेल कमेटी के नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में उनकी मांगों को पूरा करने का रोडमैप नहीं देती, तब तक उनका संघर्ष चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। यदि 22 अक्तूबर तक सरकार का रुख सकारात्मक नहीं रहा, तो इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने की चेतावनी भी दी गई है। बठिंडा जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

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