रामपुरा फूल: देश भर की सरकारें अपने राजनीतिक फायदे के लिए शहीद भगत सिंह का नाम तो लेती हैं, लेकिन उनके क्रांतिकारी विचारों को बढ़ावा देने में नाकाम रही हैं, यह बात महान स्वतंत्रता सेनानी की भतीजी बीबी गुरजीत कौर ने कही।
वह रामपुरा फूल के मेन चौक स्थित पब्लिक लाइब्रेरी की दूसरी मंजिल पर शहीद भगत सिंह मेमोरियल हॉल के उद्घाटन के अवसर पर बोल रही थीं।
यह कार्यक्रम लाइब्रेरी के अध्यक्ष योगेश सिंगला की देखरेख में आयोजित किया गया और इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध पंजाबी लेखक बलदेव सिंह सड़कनामा ने की। मुख्य भाषण जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और पचास से ज़्यादा पुस्तकों के लेखक प्रोफेसर चमन लाल ने दिया। प्रख्यात पत्रकार और आलोचक बलजीत बल्ली भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
बीबी गुरजीत कौर ने 1939 से रामपुरा फूल समुदाय की सेवा कर रहे पुस्तकालय की प्रशंसा की और राष्ट्र निर्माण में पुस्तकालयों के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “अगर कोई एक अच्छा काम है जो वास्तव में देश के भविष्य को आकार दे सकता है, तो वह है पुस्तकालयों का निर्माण।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकारों को स्कूल खोलने से आगे बढ़कर हर गाँव, कस्बे और शहर में पुस्तकालय स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और साथ ही प्रशिक्षित पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
प्रोफ़ेसर चमन लाल ने श्रोताओं से डिजिटल मीडिया के उदय के बावजूद किताबों से गहरा जुड़ाव बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “किताबें अपूरणीय हैं। एक विचारशील और जागरूक समाज के निर्माण के लिए ये ज़रूरी हैं।”
बलदेव सिंह सड़कनामा ने युवा पीढ़ी के किताबों से बढ़ते अलगाव पर चिंता व्यक्त की और श्रोताओं को याद दिलाया कि पढ़ना न केवल अतीत को समझने के लिए, बल्कि बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
लाइब्रेरी के अध्यक्ष योगेश सिंगला ने बताया कि रामपुरा फूल पब्लिक लाइब्रेरी में वर्तमान में पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी में 17,894 और उर्दू में 1,900 किताबें हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि प्रोफ़ेसर चमन लाल ने पुस्तकालय के संग्रह में 2,400 किताबें उदारतापूर्वक दान की हैं।
कार्यक्रम में लाइब्रेरी के महासचिव कैलाश कौशिक, कोषाध्यक्ष मेहर चंद बाहिया, पूर्व अध्यक्ष शिवचंद बंसल, सुनील बंसल, शशि सिंगला, कोमल सिंगला, उद्योगपति दीपक सराफ, भूषण बंसल, दीपक गोयल, के.एम. सिंगला, लाइब्रेरियन मीनाक्षी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय बुद्धिजीवी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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