अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने प्रसिद्ध पंजाबी लेखक और कवि पद्मश्री सुरजीत सिंह पातर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया हैं। उन्होंने कहा कि इस किरदार ने पंजाबी भाषा के प्रसार में अहम योगदान दिया है। उनकी प्रमुख उपलब्धि क्षेत्रीय भाषा में लेखन के लिए पद्म श्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार जैसे शीर्ष सम्मान जीतना है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि सुरजीत पातर ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रकाशन के तहत एक महत्वपूर्ण पुस्तक “तेरे दर से वागड़ी कवि-नदी-52 कवि-रचनावां” का संपादन करके दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया है। सम्मिलित कवियों की कविताएं सिख इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं। ऐसे महान लेखक का निधन उनके परिवार के साथ-साथ शैक्षणिक और पंजाबी साहित्यिक क्षेत्र के लिए भी बेहद दुखद है। वकील धामी ने सुरजीत पातर के परिवार के साथ अपना दुख साझा किया और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी।

बता दें, पंजाब के मशहूर कवि सुरजीत पातर 79 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनका की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है। सुरजीत पातर ने लुधियाना में आखिरी सांस ली है। सुरजीत पातर जालंधर के गांव पटौद कलां में जन्म हुआ और साहित्य के क्षेत्र में अहम उपलब्धियां हासिल की। उन्होंने पंजाबी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।