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चिड़ियों के लिए आशियाना बना हरप्रीत का घर, यहां रहती हैं राजकुमारियां

Harpreet’s home has become a haven for birds : मोगा। गांव निधावाला की हरप्रीत कौर ने बेजुबान पक्षियों के लिए करीब पौने दो सौ बसेरे बनाकर इंसानियत और प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की है। वह चिड़ियों को प्यार से ‘राजकुमारियां’ कहती हैं और उनके लिए घर में दाना-पानी के साथ सुरक्षित आशियाने उपलब्ध कराती हैं।

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घर के बरामदे से लेकर आंगन और बाहर के हिस्से तक, लगभग हर कोने में पक्षियों के लिए रहने के बसेरे बनाए गए हैं। इन बसेरों में आज बड़ी संख्या में चिड़ियां अपना घर बनाकर रह रही हैं। हरप्रीत कौर इन चिड़ियों को महज पक्षी नहीं मानतीं, बल्कि प्यार से इन्हें ‘राजकुमारियां’ कहती हैं। सुबह होते ही उनके घर में चिड़ियों की चहचहाहट गूंजने लगती है। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने उनके घर को अपना एक छोटा-सा संसार बना लिया हो।हरप्रीत कौर का कहना है कि उन्होंने पक्षियों के लिए यह काम किसी एहसान के तौर पर नहीं किया। उनके मुताबिक, पक्षियों का भी उतना ही हक है कि उन्हें सुरक्षित रहने के लिए जगह मिले। वह बताती हैं कि पहले हमारे दादा-परदादा कच्चे घरों में रहते थे। कच्ची दीवारों और छतों में चिड़ियां अपने घोंसले बनाकर इंसानों के साथ ही रहती थीं। उस समय चिड़ियों की चहचहाहट घरों का हिस्सा हुआ करती थी और लोग इन पक्षियों को अपने परिवार का ही सदस्य मानते थे।

समय के साथ कच्चे घरों की जगह पक्के मकानों ने ले ली। पक्की दीवारों और छतों के कारण पक्षियों के लिए घोंसले बनाने की प्राकृतिक जगहें कम होती चली गईं। इसके अलावा कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल और अन्य कारणों से भी चिड़ियों की संख्या में लगातार कमी आई हरप्रीत कौर कहती हैं कि उनकी कोशिश सिर्फ आज के पक्षियों के लिए नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी है। वह चाहती हैं कि बच्चे जानें कि कभी चिड़ियां इंसानों के घरों का हिस्सा हुआ करती थीं और उन्हें इंसानों के आसपास रहना पसंद था। उनका मानना है कि अगर हम प्रकृति और पक्षियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखना चाहते हैं तो हमें उनके लिए रहने और खाने की जगहें सुरक्षित करनी होंगी।हरप्रीत कौर की कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि उनके घर बेटी नहीं है। वह बताती हैं कि पक्षियों के साथ उनका रिश्ता इतना गहरा हो गया है कि वह उन्हें अपनी बेटियों की तरह प्यार करती हैं।हरप्रीत कौर के अनुसार, “मेरे घर बेटी की कमी को इन राजकुमारियों ने काफी हद तक पूरा कर दिया है। वह इन पक्षियों को प्यार से बुलाती हैं, उनसे बातें करती हैं और उनकी हर गतिविधि को बड़े स्नेह के साथ देखती हैं।

यही वजह है कि उनके घर आने वाले लोगों को भी ये चिड़ियां परिवार का हिस्सा ही नजर आती हैं। करीब पौने दो सौ बसेरे, सुबह होते ही लगता है चिड़ियों का मेला हरप्रीत कौर के मुताबिक, उनके घर में करीब पौने दो सौ रहने के बसेरे बनाए गए हैं। सुबह होते ही उनके घर और आसपास बड़ी संख्या में पक्षी पहुंच जाते हैं। गांव के अन्य हिस्सों से भी कई पक्षी दाना चुगने के लिए यहां आते हैं। हालांकि दूसरे पक्षी भी यहां पहुंचते हैं, लेकिन हरप्रीत कौर की ‘राजकुमारियों’ का अपने बसेरों पर पूरा राज चलता है। कई बार ये चिड़ियां दूसरे पक्षियों को अपनी आवाजों के जरिए अपने इलाके से दूर करने की कोशिश भी करती हैं।हरप्रीत कौर के लिए यह सब किसी खूबसूरत अनुभव से कम नहीं है। उन्होंने इन पक्षियों को केवल रहने की जगह नहीं दी, बल्कि उनके साथ एक भावनात्मक रिश्ता भी बना लिया है। हरप्रीत कौर की कहानी यह संदेश देती है कि प्रकृति और जीव-जंतुओं की सेवा के लिए हमेशा बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत नहीं होती। एक छोटा-सा बसेरा, दाने के कुछ दाने, पानी का एक कटोरा और दिल में पक्षियों के लिए प्यार भी उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है।आज जब बढ़ते शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आशियाने लगातार कम होते जा रहे हैं, ऐसे समय में गांव निधावाला की हरप्रीत कौर की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है।

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