उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे त्योहार को खुशी और उत्साह के साथ मनाते समय अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने बताया कि पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है और यह बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से हानिकारक हो सकता है।
डॉ. रमनदीप कौर ने लोगों को पटाखे न फोड़कर पारंपरिक दीये जलाकर पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) दीवाली मनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अस्थमा या सांस संबंधी अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को सलाह दी कि वे पटाखों के धुएं से दूर रहें और यदि संभव हो, तो दीवाली की रात, जब पटाखे फोड़े जा रहे हों, तब घर के अंदर ही रहें।
यदि पटाखे फोड़ने ही हों, तो केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से खरीदे गए ‘ग्रीन’ (पर्यावरण के अनुकूल) पटाखों का ही इस्तेमाल करें, और सरकार द्वारा तय समय-सीमा तथा शोर-शराबे से जुड़े नियमों का पालन करें। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की वेबसाइट या ‘समीर’ (Sameer) ऐप के जरिए अपने इलाके का दैनिक एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक करते रहें। यदि AQI 200 से ऊपर चला जाता है, तो सुबह की सैर, जॉगिंग और बाहर की जाने वाली भारी शारीरिक कसरत से बचना चाहिए। जब हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ (very poor) या ‘गंभीर’ (severe) श्रेणी में आ जाए, तो घर से बाहर की सभी गतिविधियों से पूरी तरह बचना चाहिए।
सिविल सर्जन ने लोगों को सलाह दी है कि वे भारी ट्रैफिक वाली सड़कों, औद्योगिक इकाइयों और निर्माण स्थलों के आसपास के इलाकों में जाने से बचें। खुले में पराली, पत्तियां, लकड़ी या कचरा जलाने से बचना चाहिए। घर के अंदर लकड़ी, कोयले या अन्य पारंपरिक ईंधनों के बजाय LPG या बिजली जैसे स्वच्छ ईंधनों का उपयोग करना चाहिए। बंद कमरों में अंगीठी जलाने से सख्ती से बचना चाहिए, क्योंकि इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जानलेवा साबित हो सकती है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल की बीमारी, सांस संबंधी समस्याओं या स्ट्रोक के इतिहास वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ऐसे लोगों को प्रदूषण के उच्च स्तर वाले दिनों में बाहर जाने से बचना चाहिए और अपनी निर्धारित दवाएं व इनहेलर हमेशा अपने साथ रखने चाहिए। मास्क के इस्तेमाल के संबंध में, सलाह दी जाती है कि जरूरत पड़ने पर N95 या N99 मास्क पहनें, जो नाक और मुंह को पूरी तरह से ढक लेते हैं। कपड़े के सामान्य मास्क, रुमाल या स्कार्फ बारीक प्रदूषक कणों से प्रभावी सुरक्षा नहीं देते हैं। यह भी सलाह दी जाती है कि घरों में हवा की आवाजाही (वेंटिलेशन) अच्छी रखें और सफाई के लिए सूखी झाड़ू की जगह गीले पोंछे का इस्तेमाल करें।

