
मंडी (हिमाचल प्रदेश): मानसून की नाजुक स्थिति के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पंडोह बांध के सभी पांच स्पिलवे गेट खोल दिए गए हैं।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने लारजी बांध के फ्लशिंग ऑपरेशन के तहत यह कदम उठाया है, जिससे ब्यास नदी में प्रति सेकंड 44,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस कदम के साथ-साथ भाखड़ा बांध में बढ़ते जलस्तर ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब के निचले इलाकों में बाढ़ के खतरे को बढ़ा दिया है।
मानसून के दौरान भारी मात्रा में गाद और तलछट जमा होने के कारण फ्लशिंग ऑपरेशन किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि गाद की मात्रा 4000 पीपीएम तक पहुंच गई है, जिसे खतरनाक रूप से उच्च माना जाता है। नतीजतन, पंडोह में इनफ्लो और आउटफ्लो को 44,000 क्यूसेक पर बनाए रखा जा रहा है।
बीबीएमबी ने बागी सुरंग से पानी का प्रवाह अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिससे देहर हाइड्रोपावर प्लांट में बिजली उत्पादन कम से कम 24 घंटे के लिए रुक जाएगा। इससे क्षेत्र में स्थानीय बिजली की कमी हो सकती है।
बीबीएमबी और स्थानीय प्रशासन ने निवासियों और पर्यटकों को ब्यास नदी के किनारों पर न जाने की चेतावनी दी है, क्योंकि जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। पशुपालकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने पशुओं को नदी के पास न ले जाएं।
लारजी बांध से पानी निकालने का काम अभी भी जारी है, जिससे ब्यास नदी में जलस्तर और बढ़ सकता है। पंडोह के निकट ज्यूणी खड्ड भी उफान पर है और अब ब्यास नदी के मुख्य प्रवाह में दरार पड़ने का खतरा है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।किसी भी आपातकालीन या बाढ़ संबंधी सहायता के लिए मंडी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करें:
किसी भी आपातकालीन या बाढ़ संबंधी सहायता के लिए मंडी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क करें:
01905-226201 / 202 / 203 / 204
व्हाट्सएप हेल्पलाइन: 85447-71889
डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन ने लोगों से आग्रह किया कि वे सभी आधिकारिक मौसम और सुरक्षा अलर्ट को गंभीरता से लें और सलाह मिलने पर सुरक्षित क्षेत्रों में चले जाएं।
उन्होंने इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान सतर्क रहने के महत्व पर जोर दिया।
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