Last Updated: October 7, 2026

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पंजाब कांग्रेस में बगावत से हाईकमान अलर्ट: पूर्व CM को दिल्ली से आया फोन, कहा – कोई बड़ा फैसला नहीं…

July 4, 2026

पंजाब कांग्रेस में बगावत से हाईकमान अलर्ट: पूर्व CM को दिल्ली से आया फोन, कहा – कोई बड़ा फैसला नहीं…

Punjab News : पंजाब कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी हाईकमान ने स्थिति संभालने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के बागी रुख के बाद दिल्ली से पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे फोन पर बातचीत की और फिलहाल कोई बड़ा राजनीतिक फैसला न लेने की सलाह दी।

राहुल गांधी की वापसी के बाद होगी अहम बैठक

चन्नी के करीबी सूत्रों के अनुसार, उन्हें आश्वासन दिया गया है कि राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद उनसे मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में पंजाब कांग्रेस में चल रहे विवाद और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा होगी।

भूपेश बघेल भी कर सकते हैं चंडीगढ़ का दौरा

सूत्रों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी जल्द चंडीगढ़ पहुंच सकते हैं। उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से अलग-अलग मुलाकात कर संगठन में जारी मतभेदों को दूर करने की कोशिश करने की संभावना है।

चन्नी ने हाईकमान के फैसले पर जताई नाराजगी

शुक्रवार को चन्नी ने अपने मोरिंडा स्थित आवास पर 50 से अधिक समर्थक नेताओं की बैठक बुलाई। इस बैठक में प्रदेश नेतृत्व से जुड़े हाईकमान के फैसले पर असहमति जताई गई और उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया। बैठक के बाद चन्नी समर्थकों ने कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर पार्टी नेतृत्व से मिलकर अपना विरोध औपचारिक रूप से दर्ज कराएंगे।

सिद्धू की रणनीति से हो रही तुलना

राजनीतिक हलकों में चन्नी की मौजूदा रणनीति की तुलना पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के 2021 के रुख से की जा रही है। उस समय सिद्धू ने भी पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाकर तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था। बाद में कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था।

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2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी समय रहते अंदरूनी मतभेदों को दूर नहीं कर पाई तो इसका असर 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है। ऐसे में हाईकमान के सामने संगठन में संतुलन बनाए रखना और दोनों गुटों को साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती बन गया है।

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