Hukamnama : आसा महला ५ ॥ दिनु राति कमाइअड़ो सो आइओ माथै ॥ जिसु पासि लुकाइदड़ो सो वेखी साथै ॥ संगि देखै करणहारा काइ पापुकमाईऐ ॥ सुक्रितु कीजै नामु लीजै नरकिमूलि न जाईऐ ॥ आठ पहर हरि नामुसिमरहु चलै तेरै साथे ॥ भजु साधसंगतिसदा नानक मिटहि दोख कमाते ॥१॥ वलवंच करि उदरु भरहि मूरख गावारा ॥ सभु किछु दे रहिआ हरि देवणहारा ॥ दातारु सदा दइआलु सुआमी काइ मनहुविसारीऐ ॥ मिलु साधसंगे भजु निसंगे कुलसमूहा तारीऐ ॥ सिध साधिक देव मुनि जनभगत नामु अधारा ॥ बिनवंति नानक सदाभजीऐ प्रभु एकु करणैहारा ॥२॥
Hukamnama अर्थ : जो कुछ दिन रात हर समय अच्छा बुराकाम आपने किया है, वह संस्कार रूप बनकर तुम्हारे मन में उकर गया है। जिससे तू (अपने किये काम) छुपा रहा हैवह तो तेरे साथ बैठा देखता जा रहा है। सिरजनहार (हरेक जीव के) साथ (बैठाहरेक के किये काम) देखता रहता है। सोकोई बुरा काम नहीं करना चाहिए, (बलिक)अच्छा काम करना चाहिए, परमात्मा कानाम सुमिरण करना चाहिए (नाम कीबरकत से) नरक कभी नहीं जाते। आठोपहर नाम सुमिरन करो, परमात्मा का नामतुम्हारा साथ करेगा। हे नानक! साध संगत में टिक कर भजन करा करो (भजन कीबरकत से पिछले) किये हुए विकार मिटजाते है॥1॥ हे मुर्ख! हे गंवार! तूं (औरों से) छल कपटकर के (अपना) पेट भरता है (रोजी कमाता है। तुझे यह बात भूल चुकी है कि) हरीदातार (सब जीवों को) हरेक चीज दे रहा है। साध सांगत में मिल (बैठ), हिचक उत्तरकर उस का भजन कर, (भजन की बरकत से अपनी) साड़ी कुलें पार निकल जाती है। जोग-साधना में पूर्ण योगी, योग-साधन करने वाले, देवते, समाधी लगाने वाले,भक्त- सभी की जिन्दगी का हरी नाम हीसहारा बना चला आ रहा है। नानक विनती करता है, सदा उस परमात्मा का भजन करना चाहिए जो आप ही सरे संसार का पैदा करने वाला है॥2॥

