
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही हार्म-रिडक्शन सेवाएँ राज्य के ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं। इन सेवाओं का उद्देश्य नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ नशीली दवाओं के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य और सामाजिक जोखिमों को कम करना है।
पंजाब में सब्सटांस यूज डिसॉर्डर (एसयूडी) से प्रभावित लोगों के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित 547 आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) केंद्र और पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी की ओर से संचालित 47 ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) केंद्र सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा टारगेटेड इंटरवेंशन के माध्यम से भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उपचार के साथ सम्मानजनक पुनर्समावेशन पर जोर
पंजाब सरकार ने हार्म-रिडक्शन को नशे की समस्या से निपटने की व्यापक रणनीति का आवश्यक हिस्सा बताया है। पंजाब सरकार ने कहा कि नशे से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने के साथ उन्हें उपचार और समाज में सम्मानजनक पुनर्समावेशन के लिए आवश्यक सहयोग एवं कौशल उपलब्ध कराना जरूरी है। पंजाब सरकार के इस दृष्टिकोण में नशे से प्रभावित लोगों को कलंक और सामाजिक बहिष्कार के कारण उपचार से दूर होने से रोकने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर दिया जा रहा है।
ओओएटी केंद्रों पर दवा और काउंसिलिंग की सुविधा
पंजाब में हार्म-रिडक्शन का प्रमुख हस्तक्षेप ओओएटी केंद्रों के जरिये किया जा रहा है। इन केंद्रों पर मरीजों को काउंसलिंग के साथ ओपिओइड यूज डिसॉर्डर के उपचार के लिए दवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। तीव्र या दीर्घकालिक दर्द के प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं भी सरकारी मनोचिकित्सक के पर्चे के आधार पर दी जाती हैं।
इस उपचार में मुख्य रूप से ब्यूप्रेनॉर्फिन (बीपीएन) या ब्यूप्रेनॉर्फिन-नालोक्सोन संयोजन का इस्तेमाल किया जाता है। निर्धारित मानदंडों के अनुसार मरीजों को रोजाना केंद्र पर दवा लेने के लिए आना होता है, जबकि पात्र मरीजों को निश्चित अवधि के लिए दवा घर ले जाने की सुविधा भी दी जाती है।
सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं के प्रति जागरूकता
हार्म-रिडक्शन कार्यक्रम के तहत नशीली दवाओं का सेवन करने वाले लोगों को स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जागरूक किया जाता है और उपचार लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जो लोग अब भी इंजेक्शन के माध्यम से नशीली दवाओं का सेवन करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य टीमें सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं के बारे में परामर्श देती हैं। इसमें इस्तेमाल की गई सिरिंज को दोबारा इस्तेमाल न करने और एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसे रक्त-जनित संक्रमणों के जोखिम को कम करने वाली प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दिया जाता है।
मेथाडोन थेरेपी के विकल्प का विस्तार
पंजाब सरकार ने ओपिओइड निर्भरता के उपचार के विकल्पों में मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी को भी शामिल किया है। लिक्विड मेथाडोन के माध्यम से ओरल सब्स्टीट्यूशन थेरेपी के लिए छह समर्पित क्लीनिक फिलहाल फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला, गुरदासपुर, मोहाली और जालंधर में संचालित किए जा रहे हैं। पंजाब में छह और मेथाडोन मेंटेनेंस ट्रीटमेंट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनके शुरू होने के बाद ऐसे समर्पित केंद्रों की कुल संख्या 12 हो जाएगी।
डब्ल्यूएचओ और एनएसीओ के निर्देशों के अनुरूप उपचार
पंजाब सरकार के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) और नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (एनएसीओ) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से ओपिओइड निर्भरता से जूझ रहे लोगों के लिए उपचार का एक विकल्प उपलब्ध कराती है।
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