अमृतसर: बार्डर इलाके में बाढ़ से किसानों की फसलों, घरों और जानवरों को हुए नुकसान का मुआवजा न देने के विरोध में आज किसानों ने कड़ाके की ठंड में अर्धनग्न होकर मोटरसाइकिलों पर विरोध मार्च निकाला। भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष के नेताओं की लीडरशिप में आज कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में किसानों ने बॉर्डर के गांव घोनेवाल से मोटरसाइकिलों पर विरोध मार्च शुरू किया।
किसानों ने पंजाब सरकार पर जमकर निशाना साधा। अपने हक के लिए हाड़ कंपा देने वाली ठंड की परवाह किए बिना किसानों ने कई किलोमीटर तक मार्च किया और सरकार से मांग की कि बाढ़ से किसानों की फसलों, घरों और जानवरों को हुए नुकसान का मुआवजा तुरंत दिया जाए। किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष के प्रदेश अध्यक्ष पलविंदर सिंह महल ने कहा कि पंजाब सरकार बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने की जो घोषणाएं कर रही है, वे सिर्फ एक ड्रामा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिर्फ अपने कुछ चहेतों को चेक देकर लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि बॉर्डर एरिया में रावी नदी से प्रभावित सैकड़ों किसान आज सरकारी मुआवज़े का इंतज़ार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ झूठे दावे कर रही है कि बाढ़ पीड़ितों को 100 परसेंट मुआवज़ा दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसलों के साथ-साथ उनके जानवरों और घरों का भी मुआवज़ा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कुदरती आफ़त के समय भी पार्टी पॉलिटिक्स कर रही है। अपने चहेतों को धोखा दिया गया है और पीड़ितों को कुछ नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इन पीड़ितों को तुरंत मुआवज़ा जारी नहीं किया, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू किया जाएगा और ज़िला लेवल पर सरकार के पुतले जलाए जाएँगे।

