चंडीगढ़: भारतीय एयरफोर्स का जंगी जहाज (फाइटर जेट) मिग-21 अब वायुसेना के बेड़े में नहीं दिखेगा। एयरफोर्स की तरफ से मिग-21 को 26 सितंबर को सेवानिवृत किया जा रहा है। यह लड़ाकू विमान 26 सितंबर को आखिरी उड़ान भरेगा। छह दशक तक वायुसेना की ताकत रहा लड़ाकू विमान को चंडीगढ़ में 12 विंग एयरफोर्स में अंतिम विदाई दी जाएगी। जंगी जहाज को आखिरी सलामी देने के लिए सूर्य किरण एरोबेटिक टीम चंडीगढ़ पहुंच गई है। बुधवार को भारतीय वायुसेना ने चंडीगढ़ वायुसेना स्टेशन पर मिग-21 विमान की सेवाओं के समापन के लिए फुल ड्रेस रिहर्सल की गई।

इस दौरान एयर फोर्स स्टेशन 12 विंग में मिग-21 की विदाई समारोह अभ्यास सत्र के दौरान मिग-21 फाइटर जेट को वाटर कैनन सैल्यूट दिया गया। वायुसेना के फाइटर जेट ने आसमान में उड़ान भी भरी। लड़ाकू विमानों की गर्जनों की आवाज पूरे शहर में गूंजी। अभ्यास के दौरान वायुसेना के जांबाजों ने आसमान में करतब दिखाए। आकाशगंगा युद्ध वीरों का कौशल देखने को मिला। मिग- 21 की विदाई के लिए आकाश गंगा स्काई डाइवर्स की टीम के करतब देख हर कोई हैरान रह गया। स्काई डाइवर्स ने 8000 फीट की ऊंचाई से कूद भी लगाई। एयरफोर्स स्टेशन 12 विंग में यह अभ्यास किया गया।

एयरफोर्स ने आज फूल ड्रेस रिहर्सल के दौरान हैरत अंगेज करतब दिखाकर दर्शकों को दांतों तले अंगुलियों को दबाने के लिए विवश कर दिया। शो के दौरान सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम, जिसे भारतीय वायु सेना के राजदूत के रूप में जाना जाता है, अपनी सटीकता, कौशल और टीम वर्क के लिए प्रसिद्ध है। लाल और सफेद रंग के आकर्षक हॉक एमके-132 जेट उड़ाते हुए, यह विशिष्ट टीम हैरतअंगेज करतबों की एक श्रृंखला का प्रदर्शन करेगी।
सुंदर लूप और रोमांचकारी बैरल रोल से लेकर गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देने वाली उल्टी उड़ान और दर्शकों के पसंदीदा डीएनए पैंतरेबाज़ी तक, हर प्रदर्शन पायलटों की बेजोड़ विशेषज्ञता और समन्वय का प्रमाण प्रस्तुत किया। चंडीगढ़ के निवासी और आगंतुक दोनों ही इस दुर्लभ अनुभव का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे क्योंकि टीम वर्क, अनुशासन और उत्कृष्टता की भावना जो कि भारतीय वायु सेना की पहचान है, का जश्न मनाते हुए आकाश शानदार संरचनाओं के कैनवास में बदल जाता है। इस दौरान सूर्यकिरण, हॉक एमके-132 जेट और मिग 21 के पालयटों ने हैरतअंगेज करतब पेश किये।
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