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अटारी-वाघा सरहद को कारोबार और लोगों की आवाजाही के लिए खोलने की पहल करें भारत-पाक सरकारें

अमृतसर Attari-Wagah border: हिंद-पाक दोस्ती मंच, फोकलर रिसर्च अकादमी, साफमा तथा पंजाब जागृति मंच की ओर से विरसा विहार में भारत-पाक संबंधों पर सैमिनार करवाया गया। इ मौके पर मंच के महासचिव सतनाम सिंह मानक तथा अकादमी के प्रधान रमेश यादव ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के 79 वें स्वतंत्नता दिवस पर हम दोनों देशों की जनता को बधाई देते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर, हम उन सभी देशभक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों को ब्रिटिश साम्राज्य से आज़ादी दिलाने के लिए अपना जीवन, मन और धन कुर्बान कर दिया। हम 1947 में उपमहाद्वीप के विभाजन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए दस लाख लोगों और 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा मारे गए 26 पर्यटकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

उन्होंने कहा कि हम 22 अप्रैल को पहलगाम (जम्मू और कश्मीर) में आतंकवादियों द्वारा 26 पर्यटकों की हत्या की कड़ी निंदा करते हैं और भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सशस्त्न संघर्ष के कारण दोनों देशों के बिगड़ते संबंधों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और दोनों देशों से द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए तत्काल बातचीत शुरू करने की अपील करते हैं। हम पाकिस्तान सरकार से यह भी माँग करते हैं कि वह किसी भी तरह से भारत-विरोधी आतंकवादी संगठनों की मदद न करे और न ही पाकिस्तानी धरती से ड्रोन के ज़रिए भारत में ड्रग्स और अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले तत्वों को प्रोत्साहित करे।

उन्होंने कहा कि देशों की सरकारों से माँग करते हैं कि 1950 में नई दिल्ली में हस्ताक्षिरत नेहरू-लियाकत अली समझौते की भावना के अनुरूप, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के जीवन और संपत्ति की पूरी सुरक्षा की जाए और जीवन के किसी भी क्षेत्न में उनके साथ भेदभाव न किया जाए।

उन्होंने कहा कि हम भारत और पाकिस्तान की सरकारों से यह भी माँग करते हैं कि अटारी और वाघा सीमाएँ व्यापार और लोगों की आवाजाही के लिए फिर से खोल दी जाएँ। भारत और पाकिस्तान के उन लोगों को वीज़ा जारी करने की प्रक्रि या फिर से शुरू की जानी चाहिए जो किसी एक देश की यात्ना करना चाहते हैं। करतारपुर साहिब कॉरिडोर को भी सिख तीर्थयात्रियों के लिए फिर से खोला जाना चाहिए ताकि वे वहाँ जाकर गुरु द्वारा साहिब के दर्शन कर सकें। देश के विभाजन के दौरान शहीद हुए दस लाख लोगों की स्मृति में क्र मश: अटारी-वाघा और भारत-बांग्लादेश सीमा पर दो शांति पार्क बनाए जाने चाहिए, जहाँ तीनों देशों के लोग समय-समय पर उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें।

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