पंजाब डेस्क: श्री आनंदपुर साहिब से संबंधित मामले की जांच के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी को सौंप दी है। रिपोर्ट में गुरुद्वारा प्रबंधन से संबंधित रिकॉर्ड, सरायों के रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच के आधार पर सामने आए तथ्यों को एडवोकेट धामी ने मीडिया के सामने रखा प्रारंभिक जांच में सरायों के रिकॉर्ड की जांच की गई। रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित महिला ने अलग-अलग समय पर विभिन्न गुरुद्वारा साहिबानों की सरायों में ठहरने के लिए कमरे लिए और।
सराय के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का दावा
एडवोकेट धामी ने कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर की जांच के साथ-साथ SGPC ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच करवाई है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले ही सोशल मीडिया पर राजनीतिक ट्रायल चलाना सिख संस्था को बदनाम करने की साजिश है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में सरायों के रिकॉर्ड की जांच की गई। रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित महिला ने अलग-अलग समय पर विभिन्न गुरुद्वारा साहिबानों की सरायों में ठहरने के लिए कमरे लिए और नियमानुसार भेंटा जमा करवाई।
सात बार श्री आनंदपुर साहिब और सात बार अमृतसर में ठहरने का रिकॉर्ड
धामी के अनुसार यह दावा गलत है कि SGPC ने संबंधित महिला को मुफ्त में कमरे या वाहन की सुविधा उपलब्ध करवाई। रिकॉर्ड के मुताबिक महिला ने श्री आनंदपुर साहिब में सात बार भेंटा देकर कमरा लिया। इस दौरान उसके साथ कई अन्य सदस्य भी सराय में ठहरे थे।
इसी तरह श्री अमृतसर में भी उसने सात बार भेंटा देकर कमरा लिया, जबकि गुरुद्वारा श्री अंब साहिब, मोहाली में दो बार उसके ठहरने का रिकॉर्ड सामने आया है।
रजिस्टर में बाद में एंट्री जोड़ने का आरोप
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सराय के इंचार्ज अमरीक सिंह ने रजिस्टर के रिकॉर्ड में कथित तौर पर छेड़छाड़ कर बाद में अलग एंट्री दर्ज की। जांच समिति के अनुसार ऐसा दो बार किया गया। चूंकि रजिस्टर में आगे के सीरियल नंबर पहले से दर्ज थे, इसलिए पिछली जगह पर एंट्री करने के साथ सीरियल नंबरों में भी बदलाव किया गया।
एडवोकेट धामी ने कहा कि इन दोनों एंट्री की लिखावट की भी जांच करवाई जाएगी, क्योंकि वह रजिस्टर की सामान्य क्रमवार लिखावट से मेल नहीं खाती।
एक लाख रुपये की सहायता पर भी दी सफाई
संबंधित महिला को SGPC की ओर से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने के मामले में धामी ने कहा कि SGPC समय-समय पर जरूरतमंद लोगों को धर्मार्थ फंड से सहायता प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि महिला ने बीमारी का हवाला देते हुए इलाज के लिए सहायता का आवेदन दिया था। आवेदन के साथ लगाए गए मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर अंतरिंग कमेटी ने सहायता राशि मंजूर की थी। धामी के अनुसार मेडिकल दस्तावेज सरकारी अस्पताल और डिस्पेंसरी से संबंधित थे।
पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच की मांग दोहराई
धामी ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी पूरी सच्चाई संगत के सामने आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस सबूत किसी की चरित्र-हत्या करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि SGPC एक पंथक संस्था है और किसी व्यक्ति की गलती के आधार पर पूरी संस्था को निशाना बनाना सिख कौम के हित में नहीं है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और पूर्ण जांच के लिए सीबीआई जांच की अपनी मांग को दोहराया।
पूर्व मैनेजर और सराय इंचार्ज निलंबित
SGPC के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने बताया कि जांच समिति की सिफारिश पर SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने जिम्मेदारी में लापरवाही के आरोप में तख्त श्री केसगढ़ साहिब के पूर्व मैनेजर मलकीत सिंह को निलंबित कर दिया है। काहलवां के अनुसार मामले में विभागीय जांच आगे भी जारी रखने के आदेश दिए गए हैं।

