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जालंधर: LADC नीति के विरोध में वकीलों ने की भूख हड़ताल

LADC policy

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जालंधर: लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) नीति के विरोध में अदालत में वकीलों द्वारा भूख हड़ताल रखी घई। संयुक्त एक्शन कमेटी के आह्वान पर अदालतों का कामकाज पूरी तरह ठप रहा। वकीलों द्वारा लीगल एड डिफेंस कौंसल सिस्टम को बंद करने की अपील की गई। एडवोकेट अशोक शर्मा ने कहाकि प्रशासन द्वारा एक स्कीम जारी की गई थी, जिसमें क्रिमनल को कोर्ट में पेश किया जाता है और उनकी तरफ से प्रशासन पेश हो जाता है। शुरू में कहा गया कि वह सिर्फ रिमांड दस्तावेजों में पेश होंगे, लेकिन केसों में भी पेयर करना शुरू कर दिया। ऐसे में एलएडीसी में वह खुद पेश हो जाते है।

जिससे वकील भाईचारें के लिए काम काफी मुश्किल हो गया है। दरअसल, इस केसों में एलएडीसी खुद मैनेज कर लेती है। इसी के विरोध में प्रदेश में विरोध किया जा रहा है। वकीलों का कहना हैकि क्रिमिनल को फ्री में केस लड़ने के लिए वकील मिल रहे है। उन्हें पता है कि फ्री में वकील उनका केस लड़ेंगे और वह जल्द जेल से बाहर आ जाएगा, लेकिन अब युवा वकीलों के लिए मुश्किल बढ़ गई है। उन्होंने कहाकि आज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक भूख हड़ताल रहेंगी। ऐसे में रोजाना वकील भूख हड़ताल पर बैठ हुए है।

एडवोकेट ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने यह नीति लागू की है। उन्होंने कहा कि यह वकीलों की सहमति के बिना लाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति मनमाने ढंग से लागू की गई है। यह संविधान के सिद्धांतों के विपरीत है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे उनकी पेशेवर स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।

आपराधिक मामलों में केवल एलएडीसी से जुड़े अधिवक्ताओं को ही कानूनी सहायता का अधिकार दिया जा रहा है। इससे अन्य वकीलों का कार्यक्षेत्र प्रभावित हो रहा है। साथ ही, यह आरोपियों के अपनी पसंद का वकील चुनने के अधिकार पर भी असर डाल सकती है।

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