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Jalandhar में आज लोक अदालत का आयोजन, 50 हजार मामलों का होगा निपटारा

Jalandhar Lok Adalat organized today

Jalandhar Lok Adalat organized today

पंजाब डेस्क: जालंधर जिले में आज वर्ष की अंतिम लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें करीब 50 हजार लंबित मामलों को सूचीबद्ध किया गया है। यह लोक अदालत नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी और पंजाब लीगल सर्विस अथॉरिटी के निर्देशों के अनुसार लगाई जा रही है। अगली लोक अदालत 10 मार्च को आयोजित होगी।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्भव सिंह गिल ने जानकारी देते हुए बताया कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को त्वरित, सुलभ और आपसी सहमति से न्याय दिलाना है। इसके लिए जालंधर में 25 बेंच गठित की गई हैं, जबकि फिल्लौर और नकोदर में 2 अतिरिक्त बेंच भी स्थापित की गई हैं।

लोक अदालत में आज ट्रैफिक चालान, मोटर दुर्घटना मुआवजा दावे (MACT), नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चेक बाउंस केस, आपराधिक मामले और विभिन्न दीवानी विवादों की सुनवाई की जा रही है। ऑनलाइन चालानों को लेकर जज गिल ने बताया कि फिलहाल ऐसे चालान उनके पास नहीं पहुंचे हैं, लेकिन यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन चालान का भुगतान करना चाहता है तो वह अदालत में याचिका दायर कर सकता है।

6 जनवरी तक चलेगा नशा मुक्ति जागरूकता अभियान

लोक अदालत के साथ-साथ जिले में 6 दिसंबर से 6 जनवरी तक नशा मुक्ति जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य नशे की चपेट में आए युवाओं को सही दिशा में लाना और उन्हें इलाज के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति केंद्रों में युवाओं का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क किया जाएगा। यह उपचार अवधि छह महीने की होगी, जिसके बाद संबंधित डॉक्टरों द्वारा उन्हें प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।

पारिवारिक और बैंक मामलों में समझौते की उम्मीद

आज की लोक अदालत में तलाक और अन्य पारिवारिक विवादों का भी निपटारा किया जाएगा। इसके अलावा बैंकिंग मामलों से जुड़ी चार कंपनियों के केस भी सूचीबद्ध हैं, जिनमें आपसी समझौते की संभावना जताई जा रही है।

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कानूनी सहायता के लिए डीएलएस कार्यालय से संपर्क

यदि नशे की समस्या से जूझ रहे किसी व्यक्ति को कानूनी सहायता की जरूरत है, तो वे जिला विधिक सेवा (DLS) कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। जज निर्भव सिंह गिल ने स्पष्ट किया कि जो लोग स्वेच्छा से नशा छोड़ने और इलाज करवाने के लिए आगे आते हैं, उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह पहल न केवल न्याय प्रक्रिया को सरल बना रही है, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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