अमृतसर- रेप और मर्डर केस में जेल में बंद डेरा सिरसा चीफ गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दिए जाने पर सवाल उठाते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सरकारें सिखों के साथ दोहरा रवैया अपना रही हैं। मीरी पीरी खालसा मार्च के दौरान ठीकरीवाल गांव में मीडिया से बात करते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि खालसा पंथ जेल में बंद उन सिखों की रिहाई के लिए संघर्ष कर रहा है जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और खासकर जत्थेदार भाई जगतार सिंह हवारा को उनकी बुजुर्ग मां से मिलने के लिए पैरोल की बात की जा रही है, लेकिन जेल में बंद सिखों को न तो रिहा किया जा रहा है और न ही भाई हवारा को पैरोल दी जा रही है।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि यह सरकारों का दोहरा रवैया है। डेरा सिरसा चीफ रेप और मर्डर जैसे जुर्म में जेल जा चुके हैं और जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तो हिंसा में कई जानें चली गईं, उन्हें बार-बार जेल से ऐसे रिहा किया जा रहा है, जैसे वह पिकनिक मनाने आए हों।
उन्होंने कहा कि जब पिछले तीन दशकों से जेलों में बंद सिंहों को पैरोल देने या रिहा करने की बात आती है, तो सिखों को पैरोल तक नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि यह भाई जगतार सिंह हवारा और उनकी बीमार मां के मानवाधिकारों का भी बड़ा उल्लंघन है कि उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा है। सरकारों को दोहरे मापदंड छोड़कर और इंसानियत को सबसे आगे रखते हुए बड़े दिल से भाई जगतार सिंह हवारा को उनकी मां से मिलने के लिए पैरोल देनी चाहिए। यह पूरी सिख कौम और इंसानियत से प्यार करने वाले संगठनों की भावना है कि भाई हवारा को पैरोल मिलनी चाहिए। बेटे अपनी मां की आंतों की तरह होते हैं और सरकार को मां के मानवाधिकारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि इसी तरह जीवित शहीद भाई बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का मामला भी लंबे समय से लंबित है। भाई जगतार सिंह हवारा, भाई परमजीत सिंह भियोरा और प्रो. देविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई का मामला भी लंबित है। प्रोफेसर देविंदरपाल सिंह भुल्लर को कभी न कभी रिहा किया जाना था, लेकिन अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने उनकी रिहाई की फाइल पर साइन नहीं किए।
📍 Location: Amritsar (Amritsar)

