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जेपी नड्डा ने की हिमाचल की विकास परियोजनाओं की समीक्षा, ₹55,103 करोड़ की राजमार्ग परियोजनाओं पर जोर

शिमलाः केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों, ग्रामीण सड़कों, रेल संपर्क, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख विकास परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार पहाड़ी प्रदेश में संपर्क सुविधाओं, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक अवसरों के विस्तार के लिए निरंतर निवेश और सहयोग उपलब्ध करा रही है। इन परियोजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार को स्वीकृत राशि का प्रभावी उपयोग, समयबद्ध निर्णय और नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।

नड्डा ने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क और रेल संपर्क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि मरीजों की अस्पताल तक पहुंच, किसानों-बागवानों की उपज को बाजार, पर्यटन, रोजगार और आपदा के दौरान राहत कार्यों से सीधे जुड़ा है। इसलिए परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और निर्धारित समयसीमा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: छह राज्यों के समझौते से महत्वपूर्ण प्रगति

समीक्षा में लगभग ₹15,624 करोड़ की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का भी उल्लेख किया गया। सितंबर 2026 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया तथा 15 सितंबर को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता हुआ। इससे लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। टोंस नदी पर हिमाचल प्रदेश–उत्तराखंड सीमा से जुड़ी इस परियोजना से जल भंडारण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

राष्ट्रीय परियोजना के रूप में इसके वित्तीय भार का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार तथा शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्य वहन करेंगे। परियोजना के माध्यम से लगभग 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा तथा 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत प्राप्त होने का अनुमान है। समीक्षा में रेणुकाजी बांध परियोजना (लगभग ₹7,000 करोड़) और लूहरी स्टेज-I जलविद्युत परियोजना (लगभग ₹1,800 करोड़) सहित महत्वपूर्ण ऊर्जा एवं जल संसाधन पहलों का भी उल्लेख किया गया।

राष्ट्रीय राजमार्ग: चार बड़े कॉरिडोर और ₹55,103 करोड़ का निवेश

समीक्षा में बताया गया कि प्रदेश में 25 राष्ट्रीय राजमार्गों का कुल नेटवर्क 2,592 किलोमीटर है, जिसमें 1,244 किलोमीटर एनएचएआई, 779 किलोमीटर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और 569 किलोमीटर सीमा सड़क संगठन के अंतर्गत हैं। एनएचएआई परियोजनाओं में कुल ₹55,103 करोड़ का निवेश है। नड्डा ने कीरतपुर–मनाली, पठानकोट–मंडी, परवाणू–शिमला और शिमला–मटौर कॉरिडोर की प्रगति की विशेष समीक्षा की।

लगभग ₹12,939 करोड़ की कीरतपुर–मनाली परियोजना के कई प्रमुख खंड पूरे हो चुके हैं; पंडोह–टकोली खंड को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस मार्ग पर 31 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 44 किलोमीटर है। यह मार्ग मंडी, कुल्लू और मनाली में सुरक्षित एवं सुगम आवाजाही तथा पर्यटन को मजबूत करेगा।

परवाणू–सोलन–शिमला बाईपास परियोजना (लगभग ₹8,950 करोड़) में परवाणू–सोलन खंड पूरा हो चुका है। सोलन–कैथलीघाट खंड सितंबर 2027 और शिमला बाईपास सितंबर 2028 तक पूरा होने की अपेक्षा है। पठानकोट–मंडी परियोजना पर लगभग ₹10,805 करोड़ के कार्य 2028–29 तक तथा शिमला–मटौर कॉरिडोर पर लगभग ₹10,226 करोड़ के प्रस्तावित कार्य 2029–30 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पिंजौर–बद्दी–नालागढ़ परियोजना पर भी काम जारी है।

ब्यास नदी से जुड़े राजमार्ग खंडों की सुरक्षा तथा बाढ़ एवं भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थायी बहाली के लिए ड्रेजिंग और डी-सिल्टिंग की अनुमतियों पर शीघ्र निर्णय का मुद्दा उठाया गया। प्रस्तावित भुभु जोत सुरंग की डीपीआर तैयार करने के लिए बोलियां आमंत्रित किए जाने की जानकारी भी दी गई। नड्डा ने सुरक्षित सड़क निर्माण और केंद्र–राज्य समन्वय को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

ग्रामीण सड़कें: 26,506 किलोमीटर स्वीकृत, शेष कार्य जल्द पूरे हों

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में 4,170 सड़कों के लिए लगभग ₹13,697 करोड़ की लागत से कुल 26,506 किलोमीटर सड़कें स्वीकृत हैं। प्रगति विवरण के अनुसार 23,601 किलोमीटर सड़कें पूरी हो चुकी हैं और लगभग 90 प्रतिशत पात्र बसावटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराया गया है। नड्डा ने प्रथम चरण की शेष 9 सड़कों को मार्च 2027 तक पूरा करने तथा पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत स्वीकृत 25 कार्यों के ठेके शीघ्र आवंटित करने को कहा। उन्होंने गुणवत्ता निगरानी मजबूत करने और दूरस्थ गांवों के लिए सड़क संपर्क में देरी न होने देने पर जोर दिया।

रेल संपर्क: भूमि अधिग्रहण और राज्य हिस्सेदारी से जुड़े मामले सुलझें

लगभग ₹13,410 करोड़ की भानुपल्ली–बिलासपुर–बेरी रेल परियोजना के भानुपल्ली–बिलासपुर खंड को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बिलासपुर–बेरी खंड में भूमि अधिग्रहण संबंधी लंबित मामलों पर राज्य स्तर से शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई। नड्डा ने कहा कि समय पर निर्णय रेल संपर्क के विस्तार को गति देंगे।

चंडीगढ़–बद्दी रेल लाइन की अनुमानित लागत ₹1,540 करोड़ है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। समीक्षा के अनुसार लगभग ₹1,160 करोड़ व्यय हो चुके हैं, जबकि राज्य की देय हिस्सेदारी में से करीब ₹231 करोड़ अभी हस्तांतरित किए जाने हैं। नड्डा ने लंबित राशि शीघ्र उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए कहा कि बद्दी जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए रेल संपर्क माल परिवहन, निवेश और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य अवसंरचना: विशेषज्ञ उपचार और मेडिकल कॉलेजों का विस्तार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। बिलासपुर में एम्स के लिए ₹1,400 करोड़ से अधिक, चंबा, नाहन और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों के लिए लगभग ₹547 करोड़, ऊना के पीजीआई सैटेलाइट सेंटर के लिए ₹495 करोड़ तथा आईजीएमसी शिमला के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के लिए लगभग ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इन प्रयासों से राज्य के मरीजों की अन्य शहरों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) समर्थित लगभग ₹1,422 करोड़ की स्वास्थ्य परियोजना को जून 2025 में स्वीकृति मिली थी। इसमें 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार के अनुदान के रूप में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके तहत हमीरपुर, नाहन, नेरचौक, टांडा, चंबा और आईजीएमसी शिमला के मेडिकल कॉलेजों को सुदृढ़ करने के साथ उन्नत एमआरआई, कैंसर उपचार और अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जानी हैं।

स्वीकृत स्वास्थ्य निधि को समय पर जनसुविधाओं में बदलने पर जोर

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) के तहत 2021–22 से 2025–26 की अवधि के लिए हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹360 करोड़ की स्वीकृति दी गई। समीक्षा के अनुसार स्वीकृत 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से 1 पूरा हुआ है; 12 एकीकृत जनस्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से कोई पूरी नहीं हुई है तथा 73 ब्लॉक जनस्वास्थ्य इकाइयों में से 29 का निर्माण पूरा हुआ है।  नड्डा ने इन कार्यों में तेजी लाने और नई सुविधाओं का संचालन समय पर सुनिश्चित करने पर बल दिया।

15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत ₹521 करोड़ में से लगभग ₹390 करोड़ खर्च होने की जानकारी दी गई। नड्डा ने कहा कि केवल राशि की स्वीकृति पर्याप्त नहीं है; ग्रामीण जांच सुविधाओं, आपातकालीन उपचार और जिला स्तर पर विशेषज्ञ सेवाओं के रूप में उसका वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए निर्माण, व्यय और संचालन की नियमित समीक्षा जरूरी है।

उद्योग और पुनर्निर्माण: स्वीकृत सहायता का प्रभावी उपयोग हो

ऊना के बल्क ड्रग पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ की केंद्रीय अनुदान सहायता का प्रावधान है, जिसमें ₹225 करोड़ जारी और लगभग ₹117 करोड़ उपयोग किए गए हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए लगभग ₹100 करोड़ का परिव्यय प्रस्तावित था, लेकिन राज्य सरकार ने अक्टूबर 2024 में प्रस्ताव वापस लेकर ₹30 करोड़ की किस्त लौटा दी। नड्डा ने कहा कि इन औद्योगिक अवसरों का समयबद्ध उपयोग निवेश, उत्पादन और युवाओं के रोजगार के लिए आवश्यक है। समीक्षा में अन्य शैक्षणिक और शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति भी देखी गई।

प्रदेश में पूंजीगत निवेश तथा आपदा के बाद पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र की सहायता पर भी चर्चा हुई। वित्त वर्ष 2024–25 में पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता के तहत ₹2,381 करोड़, आपदा उपरांत पुनर्बहाली के लिए ₹2,006 करोड़ तथा बाह्य सहायता प्राप्त पुनर्निर्माण परियोजना के लिए ₹2,150 करोड़ के प्रावधानों का उल्लेख किया गया। नड्डा ने समन्वित कार्रवाई और स्वीकृत संसाधनों के पारदर्शी उपयोग पर जोर दिया।

जनहित से जुड़े कार्यों में गति और जवाबदेही सुनिश्चित करे राज्य सरकार

समीक्षा के अंत में नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रही है। अब प्राथमिकता स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने और उनके परिणाम जनता तक पहुंचाने की होनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से लंबित सड़क एवं रेल कार्यों, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर समयबद्ध निर्णय लेने, नियमित निगरानी करने तथा स्वीकृत निधि का गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

📍 Location: शिमला (शिमला)

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