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जस्टिस दीपक ने DLSA अमृतसर का किया दौरा, कानूनी जागरूकता पर जोर

Paper leak case

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Justice Sibal Reviews Legal Services in Amritsar : अमृतसर। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं PULSA के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस दीपक सिबल ने DLSA अमृतसर कार्यालय का दौरा कर कानूनी जागरूकता, न्याय तक पहुंच और वैकल्पिक विवाद समाधान से जुड़ी पहलों की समीक्षा की। उन्होंने कमजोर एवं वंचित वर्गों तक कानूनी सहायता पहुंचाने के साथ स्कूल-कॉलेजों में POCSO एक्ट और 16 से 21 वर्ष के युवाओं के बीच नशा-विरोधी जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने पर जोर दिया।

इस दौरान उन्होंने कार्यालय के अधिकारियों, मध्यस्थों तथा विधिक बिरादरी के सदस्यों के साथ बातचीत करते हुए कानूनी जागरूकता, न्याय तक पहुंच तथा वैकल्पिक विवाद समाधान से संबंधित पहलों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर सुश्री जतिंदर कौर, माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, DLSA अमृतसर; श्री अमरदीप सिंह बैंस, माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, DLSA अमृतसर; श्री गुरप्रीत सिंह पनेसर, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन अमृतसर सहित बार के विभिन्न सदस्य, पैनल अधिवक्ता तथा मध्यस्थ उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में माननीय न्यायमूर्ति सिबल ने समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर कमजोर एवं वंचित वर्गों तक कानूनी सहायता पहुंचाने में कानूनी सेवाएं प्राधिकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी सेवाएं केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निरंतर जागरूकता अभियानों के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों तथा आम जनता तक भी पहुंचनी चाहिए।

बैठक के दौरान स्कूलों एवं कॉलेजों में बच्चों को Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act के संबंध में अधिक से अधिक जागरूक करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप एवं संवेदनशील तरीके से सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, व्यक्तिगत सुरक्षा, उनके अधिकारों तथा सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों के बारे में जानकारी देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

नशे की समस्या को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायमूर्ति सिबल ने विशेष रूप से 16 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए नशा-विरोधी जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा समाज का महत्वपूर्ण आधार हैं और उन्हें नशे के स्वास्थ्य, सामाजिक, कानूनी तथा दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के बारे में समय रहते जागरूक करना नशा रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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