पंजाब डेस्क : आज संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) एवम किसान मजदूर मोर्चा की साझा बैठक चंडीगढ़ के किसान भवन में हुई जिसमें दोनों मोर्चों के वरिष्ठ नेताओं ने विस्तार से चर्चा करी। बैठक में किसान नेताओं ने तय किया कि कल दोनों मोर्चों की तरफ से केंद्र सरकार को दोबारा चिट्ठी लिखकर मांग करी जाएगी कि पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों की गैर-मौजूदगी में केंद्र सरकार एवम संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) व किसान मजदूर मोर्चा के प्रतिनिधियों के बीच बैठक आयोजित करी जाए, किसान नेताओं ने कहा कि उनका मानना है कि बातचीत के माध्यम से ही मुद्दों का समाधान होता है और वो बातचीत के लिए तैयार हैं।
किसान मोर्चों को भेजी चिट्ठी
किसान नेताओं ने कहा कि 1 मई को केंद्र सरकार ने किसान मोर्चों को भेजी चिट्ठी में कहा कि संघीय ढांचे की रक्षा के लिए पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल करना जरूरी है लेकिन केंद्र सरकार ने सैंकड़ों बार राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण कर के संघीय ढांचे को कमज़ोर करने का काम किया है, 2020 में लाये गए 3 कृषि कानून राज्य सरकारों के अधिकारों पर हमला था लेकिन उस समय केंद्र सरकार ने संघीय ढांचे के बारे में चिंता नहीं करी इसलिए पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों को प्रस्तावित बैठक में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संघीय ढांचे की रक्षा की दुहाई देना ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर है। किसान नेताओं ने कहा कि 19 मार्च को सरकारों द्वारा मोर्चों पर किये गए हमले की घटना ने किसानों एवम सरकारों के बीच में अविश्वास की खाई को ओर अधिक गहरा किया है जिसकी भरपाई होना बहुत मुश्किल है।

6 मई को शम्भू पुलिस थाने के सामने प्रदर्शन
किसान नेताओं ने कहा कि शम्भू एवम दातासिंहवाला-खनौरी किसान मोर्चे पर पुलिस द्वारा किसान नेताओं बलवंत सिंह बेहरामके समेत अन्य किसानों के साथ किये गए दुर्व्यवहार एवम मोर्चों पर करी गयी हिंसात्मक कारवाई के खिलाफ 6 मई को शम्भू पुलिस थाने के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि हालिया समय में हरियाणा पुलिस द्वारा किसानों को खेड़ी चौपटा सहित आंदोलन सम्बन्धी अन्य मुकदमों में नोटिस भेजे जा रहे हैं, दोनों मोर्चों ने आज मीटिंग में इस मुद्दे पर गम्भीरतापूर्ण चर्चा करी और ऐलान किया कि यदि हरियाणा पुलिस ने किसानों को ये नोटिस भेजने बंद नहीं किये तो दोनों मोर्चों को बड़ा कार्यक्रम देने पर मजबूर होना पड़ेगा जिसकी ज़िम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी। किसान नेताओं ने बताया कि 25 मई को दोनों मोर्चों की साझा रिव्यु बैठक होगी जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के मोर्चे के आर्थिक हिसाब-किताब समेत अन्य मुद्दों पर जनता के सामने विस्तृत बातचीत रखी जायेगी।