अमृतसर: ‘लापता पंजाब’ संगठन ने एक खास प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें 1984 से 1995 के बीच पंजाब में हुए ह्यूमन राइट्स वायलेशन, फर्जी पुलिस एनकाउंटर और जली हुई लाशों का सच लोगों के सामने लाया गया। संगठन के लीडर एडवोकेट बलजिंदर सिंह बाजवा और सतनाम सिंह बैंस ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा की ज़िंदगी पर बनी हालिया फिल्म ‘सतलुज’ के बाद उस दौर का सच जानने की नई पीढ़ी में उत्सुकता बढ़ी है, लेकिन यह फिल्म खालड़ा साहिब के कारनामों का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा दिखाती है।
कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि भाई खालड़ा ने अमृतसर, पट्टी और तरनतारन के श्मशान घाटों से 2,097 लावारिस लाशों का डेटा इकट्ठा किया था और 25,000 लावारिस लाशों का अंदेशा जताया था। उनके गायब होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI ने जांच की, लेकिन करीब 70 FIR ही दर्ज हुईं, जिनमें से 20 में क्लोजर रिपोर्ट दी गई। बाकी केस में से कई 40 साल बीत जाने के बावजूद अभी भी कोर्ट में पेंडिंग हैं।
संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने 2008 से गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक से डॉक्यूमेंट्री रिसर्च शुरू की थी। इस दौरान वे पंजाब के अलग-अलग जिलों में गए और परिवारों से मिले। रिसर्च के आधार पर संगठन ने 8,257 लोगों का पूरा डेटा इकट्ठा किया और 2019 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में PIL फाइल की, जिसमें अब तक सबूतों के साथ केस की संख्या 9,000 के करीब पहुंच गई है।
नेताओं ने सरकारों और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बेगुनाह नौजवानों की हत्या करने वाले पुलिस अधिकारियों को सजा देने के बजाय उन्हें इनाम और प्रमोशन दिए गए। SI रैंक के अधिकारी आज IG और SSP तक के पदों पर बैठे हैं। यहां तक कि केस लड़ रहे गवाहों और पीड़ित परिवारों को भी डराया-धमकाया जा रहा है और उन पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की गई है। संगठन ने कांग्रेस, अकाली दल और मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बादल सरकार ने आरोपी पुलिसवालों को बचाने के लिए ‘लिटिगेशन सेल’ बनाकर सरकारी और आर्थिक मदद दी।
इसके साथ ही संगठन ने सिख ज्यूडिशियल कमीशन और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SGPC से जुड़े कुछ बड़े पदाधिकारी और वकील CBI कोर्ट में आरोपी पुलिसवालों का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने शिरोमणि कमेटी और अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अपील की कि वे संगत के सामने यह साफ करें कि इन 8-9 हजार पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने अब तक कोर्ट में क्या कदम उठाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़ित परिवार भी मौजूद थे, जिन्होंने अपने साथ हुए जुल्म की व्यथा शेयर की।
📍 Location: Amritsar (Amritsar)

