मोगा: नेचर पार्क मोगा में लिखारी सभा की बैठक डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के दौरान केंद्रीय लेखक सभा की चुनाव प्रक्रिया को लेकर साहित्यकारों ने विचार-विमर्श किया। इसके अलावा साहित्यिक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा साहित्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को लेकर भी चर्चा की गई।
बैठक के दौरान आयोजित साहित्यिक महफिल में शहर के विभिन्न साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर खूब रंग जमाया। साहित्यकारों ने गीत, गजल और कविताओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, रिश्तों, जीवन तथा मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों को सामने रखा।
इस अवसर पर सभा के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों ने अपना गीत ‘जोड़ा झांजरां दा’ प्रस्तुत किया। मास्टर प्रेम कुमार ने ‘इंकलाबी मोर्चे’ गीत, परमजीत सिंह चूहरचक्क ने ‘गुम हुए रिश्ते’ कविता तथा प्यारा सिंह चाहल ने ‘जिंदगी का पंध’ गजल पेश की। गुरनाम सिंह गामा ने ‘पींघ हुलारे लैंदी’ रचना प्रस्तुत की, जबकि गिल कोटली ने ‘महल’ कविता पेश की।
जंगीर सिंह खोखर ने ‘घर’ कविता, बलवीर सिंह परदेसी ने ‘चंगा हुंदा है’ गजल, जोध सिंह ने ‘पंज पत्तियां ते कागज दे फूल’ कविता, मीत गुरमीत ने ‘अंदर’ गजल तथा विजय विवेक ने अपनी कविता प्रस्तुत की। सोनी मोगा ने ‘चंगे वी लोक बथेरे’ गीत और बलविंदर सिंह कैथ ने ‘भाइयों जैसा प्यार’ गीत पेश कर साहित्यिक महफिल को यादगार बनाया। मंच संचालन मीत गुरमीत ने किया।
बैठक के दौरान पिछले दिनों दिवंगत हुए साहित्यकार धर्मपाल उपासक, हरभजन बाजवा और महेंद्र दुसांझ की असामयिक मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।
इस मौके पर मोगा का मान कहे जाने वाले बुजुर्ग लेखक जोध सिंह द्वारा तैयार की गई पेंटिंग साहित्यकारों की ओर से प्यारा सिंह चाहल को भेंट की गई। अंत में डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों ने बैठक में शामिल सभी साहित्यकारों का धन्यवाद किया।
📍 Location: मोगा

