मोगा: लोक साहित्य अकादमी मोगा की ओर से भाषा विभाग मोगा के सभागार में साहित्यिक समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रसिद्ध उपन्यासकार बलदेव सिंह सड़कनामा के प्रथम काव्य संग्रह ‘गाहे बगाहे कभी कदाई’ तथा धर्म सिंह गोराया (अमेरिका) की वार्तक पुस्तक ‘रावी मेरे आर-पार’ का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के नामवर साहित्यकारों, लेखकों, बुद्धिजीवियों और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। समागम की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर एवं जिला भाषा अधिकारी डॉ. अजीतपाल जटाणा ने की। अध्यक्ष मंडल में बलदेव सिंह सड़कनामा, डॉ. सुरजीत बराड़ घोलिया, धर्म सिंह गोराया और लेफ्टिनेंट कर्नल बाबू सिंह शामिल रहे।
शायर चरणजीत समालसर और डॉ. सुरजीत बराड़ घोलिया ने दोनों पुस्तकों से श्रोताओं का परिचय करवाते हुए रचनाओं पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बलदेव सिंह सड़कनामा का पहला काव्य संग्रह उनके छह दशकों के काव्य अनुभव तथा जीवन के विभिन्न रंगों को खूबसूरती से प्रस्तुत करता है। वहीं धर्म सिंह गोराया की पुस्तक ‘रावी मेरे आर-पार’ में मानवीय संवेदनाओं, भारत-पाक विभाजन के दर्द, प्रवासी जीवन और रावी से जुड़े ऐतिहासिक अनुभवों को बारीकी से उकेरा गया है।
डॉ. अजीतपाल जटाणा ने दोनों लेखकों के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि दोनों पुस्तकें पंजाबी साहित्य में महत्वपूर्ण वृद्धि हैं। अकादमी के अध्यक्ष कर्नल बाबू सिंह ने कहा कि सड़कनामा ने उपन्यास लेखन के बाद कविता के क्षेत्र में कदम रखकर पाठकों को नया साहित्यिक तोहफा दिया है।
इस अवसर पर दोनों रचनाकारों ने अपनी पुस्तकों के सृजन से जुड़े अनुभव साझा किए। भाषा विभाग की ओर से धर्म सिंह गोराया का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में धूरी से पहुंचे साहित्यकार मूल चंद शर्मा ने गीत प्रस्तुत किया, जबकि मास्टर प्रेम कुमार ने तरन्नुम में गीत पेश कर माहौल को संगीतमय बना दिया। मंच संचालन चरणजीत समालसर ने किया। समागम में अवतार कमाल, कुलविंदर दिलगीर, डॉ. सरबजीत कौर बराड़, प्रिं. अवतार सिंह करीड़, कर्मजीत कौर लंडेके सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार व साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। अंत में अकादमी अध्यक्ष ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
📍 Location: मोगा

