जालंधर: पंजाब में अप्रैल के शुरुआती हफ्तों से ही तेज गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, और इसके साथ ही राज्य में बिजली संकट भी गहराता जा रहा है। बढ़ती मांग के बीच पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा विभिन्न शहरों में लगातार बिजली कट लगाए जा रहे हैं। हालांकि विभाग इन कटों को “मेंटेनेंस शटडाउन” बता रहा है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
मांग बढ़ी, सप्लाई पीछे छूटी
राज्य में बिजली की मांग अचानक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जहां अप्रैल की शुरुआत में मांग करीब 6,500 मेगावाट थी, वहीं अब यह बढ़कर 10,000 मेगावाट से ऊपर जा चुकी है। इसके मुकाबले उपलब्ध बिजली लगभग 8,000 मेगावाट के आसपास ही है। इस अंतर के चलते पावरकॉम को मजबूरन लोड शेडिंग करनी पड़ रही है।
उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं
पंजाब के पास करीब 15,000 मेगावाट की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता है, लेकिन वर्तमान में वास्तविक उत्पादन काफी कम है। थर्मल प्लांट्स की कुछ यूनिट्स में मेंटेनेंस कार्य और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से कम उत्पादन इसकी बड़ी वजह है। नदियों में पानी की कमी के कारण जलविद्युत परियोजनाएं अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पा रही हैं।
हाइड्रो और थर्मल सेक्टर दोनों प्रभावित
रणजीत सागर डैम जैसे बड़े प्रोजेक्ट अपनी क्षमता के मुकाबले बहुत कम बिजली पैदा कर रहे हैं। वहीं कुछ थर्मल प्लांट्स की यूनिट्स पहले से बंद होने के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है। अब बढ़ती मांग को देखते हुए इन्हें दोबारा चालू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन स्थिति तुरंत सुधरती नजर नहीं आ रही।
उद्योग और आम लोग दोनों परेशान
लंबे बिजली कटों का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। वहीं भीषण गर्मी के बीच पानी की सप्लाई बाधित होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
कई शहरों में जारी रहेंगे कट
मोहाली, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा जैसे शहरों में 4 से 8 घंटे तक के बिजली कट लगाए जा रहे हैं। कुछ इलाकों में यह कट सुबह से शाम तक जारी रहने की संभावना है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी शटडाउन का असर देखने को मिल रहा है।
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आगे और बिगड़ सकती है स्थिति
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। ऐसे में बिजली की मांग और बढ़ सकती है, जिससे संकट और गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन और सप्लाई के बीच संतुलन नहीं बनाया गया, तो आने वाले दिनों में कटौती और बढ़ सकती है।
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