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अमृतसर में सड़कों पर पशुओं को खुला छोड़ने और चराने पर पूर्ण प्रतिबंध, जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किए आदेश

पंजाब डेस्क: अमृतसर में सड़कों पर खुले घूमने वाले पशुओं और सड़क किनारे चराई को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट दलविंदरजीत सिंह ने जिले की सड़कों पर पशुओं को खुला छोड़ने और सड़क किनारे चराने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। नए आदेशों के तहत पशुपालकों और चरवाहों को अपने पशुओं को निर्धारित बाड़ों के अंदर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना, यातायात व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान से बचाना है।

सड़कों पर पशुओं के घूमने से हादसों का खतरा

जिला प्रशासन के अनुसार, विभिन्न संगठनों की ओर से शिकायतें मिली थीं कि अमृतसर जिले में कई पशुपालक और चरवाहे अपने पशुओं को चराने के लिए सड़कों पर ले आते हैं या उन्हें सड़क किनारे खुले में छोड़ देते हैं।

इससे यातायात प्रभावित होता है और वाहन चालकों के लिए दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। अचानक सड़क पर पशुओं के आने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पशुओं और लोगों दोनों को जान-माल का नुकसान हो सकता है।

पशुपालकों को बाड़ों में रखने होंगे पशु

जिला मजिस्ट्रेट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि सभी पशुपालकों और चरवाहों को अपने पशु बाड़ों के अंदर ही रखने होंगे। इसके साथ ही पशुओं के रहने वाले स्थानों की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना होगा।

प्रशासन ने कहा है कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं को खुला छोड़ना स्वीकार नहीं किया जाएगा। पशुओं के उचित रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित पशुपालकों की होगी।

सड़क किनारे लगे पौधों और किसानों की फसलों को भी नुकसान

प्रशासन के मुताबिक, खुले घूमने वाले पशु केवल यातायात के लिए ही समस्या नहीं बन रहे, बल्कि सड़कों के किनारे हरियाली और छाया के लिए लगाए गए पौधों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इसके अलावा कई मामलों में पशुओं द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। इससे किसानों और पशुपालकों के बीच विवाद होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे विवाद आगे चलकर कानून-व्यवस्था की समस्या भी पैदा कर सकते हैं।

2 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे आदेश

जिला मजिस्ट्रेट दलविंदरजीत सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने, यातायात को सुचारू रखने, सरकारी और निजी संपत्ति की सुरक्षा करने तथा जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध जरूरी है।

प्रशासन की ओर से जारी आदेश 2 जनवरी 2027 तक लागू रहेंगे। इस दौरान पशुपालकों और चरवाहों को सभी निर्देशों का पालन करना होगा। प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि वे सार्वजनिक सुरक्षा और शहर की व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

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