लुधियाना: शहर की स्थानीय अनाज मंडियों में परमल धान की आवक तेजी से बढ़ रही है। वहीं, सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। आज माछीवाड़ा मार्केट का दौरा करने पर सामने आया कि किसान अपनी फसल बेचने के लिए तीन-तीन दिन से मंडी में बैठे हैं।
मंडी में फसल बेचने पहुंचे किसान राजिंदर सिंह झार साहिब और अर्शदीप सिंह कादियाना ने कहा कि पिछले वर्ष सरकार ने 20 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू कर दी थी, जबकि इस बार खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होने की बात कही गई है। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि इस बार सरकार के निर्देशों के अनुसार कम समय में पकने वाली धान की किस्मों की रोपाई की गई थी, जिससे पानी की बचत हुई। अब फसल समय से पहले मंडियों में पहुंच रही है, लेकिन आढ़तियों को 1 अक्टूबर तक सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार करने को कहा जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द खरीद शुरू नहीं की गई तो 1 अक्टूबर तक मंडियों में धान के भंडारण के लिए जगह की भारी कमी हो सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द सरकारी खरीद शुरू करने के आदेश जारी किए जाएं।
वहीं, आढ़तिया एसोसिएशन के प्रदेश सचिव अरविंदरपाल सिंह विक्की और आढ़तिया के वकील कपिल आनंद ने कहा कि इस बार अगेती धान की आवक काफी अधिक है। किसानों का कहना है कि यदि सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो उन्हें अपनी फसल निजी तौर पर कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसे में किसान मंडियों में अपनी फसल बेचने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि समय पर अगली फसल की तैयारी कर सकें। किसानों ने सरकार से कृषि बिल को तत्काल वापस लेने की भी मांग की है।
बताया जा रहा है कि माछीवाड़ा मंडी में अब तक 50 हजार क्विंटल से अधिक धान बिक्री के लिए पहुंच चुका है, जबकि आधिकारिक आंकड़े इससे कम बताए जा रहे हैं। किसानों और आढ़तियों का कहना है कि यदि सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से ही शुरू होती है, तो तब तक मंडियों में बड़ी मात्रा में धान पहुंचने से भंडारण और खरीद व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
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