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दसूहा: प्रभु कृपा दुख निवारण का समागम, महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी का श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

दसूहा: भगवान शिव ने कहा है कि हे पार्वती मां दुर्गा ने ही चराचर जगत को पैदा किया है। जिसे मां दुर्गा सिद्ध हो जाती है, उसे तीनों लोकों में कुछ भी असाध्य नहीं रह जाता। वह साधक महादेवी के समान होकर सर्वत्र पूजनीय हो जाता है। वह दुखों, रोगों, कष्टों से मुक्त होकर अथाह धन-संपत्ति का मालिक बन जाता है। दुनिया भर के अन्य लोग भी यदि उसकी शरण में श्रद्धापूर्वक जाएं तो वह भी मां दुर्गा की कृपा से अपने सभी पापों से मुक्त होकर सद्गति को प्राप्त करता है। यदि आप अपना तथा अपने परिवार का भला करना चाहते हैं तो मां दुर्गा के पाठ के बगैर घर से बाहर पैर न रखें। इस पाठ को करने वाला साधक शतायु होकर आनंदित जीवन व्यतीत करता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जब तक यह पृथ्वी बनी रहती है तब तक उसकी संतान परंपरा भी चलती रहती है। यह पाठ देवताओं को भी दुर्लभ है। मां दुर्गा ने इस पाठ को केवल देवताओं और महाब्रह्मर्षियों को ही प्रदान किया है। ये उद्‌गार अनंतश्री विभूषित जगद्‌गुरु महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी ने 12 सितंबर 2026 को सायं 4 बजे, हाजीपुर रोड, कैम्ब्रिज स्कूल के सामने, शंकर एंक्लेव, दसूहा, जिला होशियारपुर में गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर आयोजित प्रभु कृपा दुख निवारण समागम में श्रद्धालुओं से खचाखच भरे पंडाल में व्यक्त किए।

इस समागम में संत समाज, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, धार्मिक संस्थाओं के विद्वानों, प्रशासनिक अधिकारियों व राजनीतिक क्षेत्र से संबंधित गणमान्य लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर प्रभु कृपा ग्रहण की। इस समागम में जगद्‌गुरु महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी ने अवधान के माध्यम से श्रद्धालुओं को तत्क्षण दुख निवारण की कृपा प्रदान की। समागम में श्रद्धालुओं के अनुभव सुनकर वहां उपस्थित डाक्टर, वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी हैरान रह गए। समागम में आए श्रद्धालुओं के लिए अनवरत रूप से लंगर चलता रहा। समागम में निशुल्क स्वास्थ्य जांच कैम्प का आयोजन किया गया जिसमें मरीजों को मुफ्त औषधि भी प्रदान की गई।

जगद्‌गुरु महाब्रह्मर्षि जी ने कहा कि आज से एक दिन बाद ही गणेश चतुर्थी का पावन पर्व है जो भगवान गणेश के जन्मोत्सव के उपलक्ष में मनाया जाता है। इस दिन लोक मान्यता के अनुसार भगवान का आगमन होता है अतः श्रद्धालु भक्त अपने घर में इनकी मूर्ति की स्थापना करते हैं और दस दिन तक पूजा करते हैं। तत्पश्चात इनका जल में विसर्जन कर देते हैं। भगवान गणेश ज्ञान, समृद्धि के देवता और विघ्न नाशक हैं तथा सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाले हैं। ये बुद्धि और विवेक के देवता हैं। हर शुभ कार्य से पूर्व इनकी प्रथम पूजा की जाती है इसलिए ये प्रथम पूज्य देव कहलाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने लिए एक बालक की मूर्ति का निर्माण करके जीवनदान दिया था। जब पार्वती मां स्नान के लिए गईं तो इन्हें पहरेदार नियुक्त कर दिया। थोड़ी ही देर में भगवान शिव वहां आए तो बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस पर क्रोधित होकर भगवान शिव ने

अपने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया। माता पार्वती को जब यह मालूम हुआ तो वे बहुत क्रोधित होकर रुदन करने लगी। जिस पर भगवान शिव ने उस बालक की गर्दन पर एक हाथी का सिर प्रत्यारोपित कर दिया और जीवित भी कर दिया। तभी यह ये गजानन कहलाए। इनकी जो पूरा करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी देवता भी उस पर प्रसन्न हो जाते हैं।

जगद्‌गुरु महाब्रह्मर्षि जी ने कहा कि आज की परिस्थितियों में पूरे विश्व में 90 प्रतिशत महिलाओं में अनेकों रोग पाए जा रहे हैं। भयंकर कीटाणुओं से अनेक रोग पैदा हो रहे हैं उनमें यूरिन इंफेक्शन, फंगल, बैक्टीरिया, वायरल वाले सभी रोग हैं जिनमें ट्यूबरोक्लॉसिस, हरपीज, किडनी के रोग, पेट के रोग, ल्यूकोरिया, स्त्रियों में हार्मोन्स इंबैलेंस, चेहरों में झुर्रियां पड़ना, सिर के बाल झड़ना, कम उम्र में बुढ़ापा आना, मानसिक तनाव होना शामिल हैं। इन असाध्य रोगों के अतिरिक्त यह भी आश्चर्यजनक है कि कुछ रोग जन्म से ही हो जाते हैं। आजकल बुजुर्गों और युवाओं में सैप्सिस, गुर्दे फेल होना, रक्त संक्रमण का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। यूटीआई एक वर्ष की बालिका को भी हो सकता है और सौ साल की स्त्री को भी हो सकता है। इसके कारण अनेकों रोग पैदा हो जाते हैं।

जब मैं अमेरिका, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया जैसे देशों की जनकल्याण यात्रा पर गया तो वहां स्त्रियों में यूटीआई के संक्रमण की भयंकरता को देखा। वहां के डाक्टर और वैज्ञानिक कहने लगे कि इसका उपाय एंटीबायोटिक दवाइयां हैं लेकिन महिलाओं का कहना था कि इससे स्थायी समाधान नहीं होता है। डाक्टर कहने लगे कि इसका कोई समाधान नहीं है तब मैंने उनसे कहा कि इसका समाधान दैवव्यपाश्रय है। उनकी समझ में नहीं आया तब मैंने उन्हें मिरेकल वंडर वाश दी, जिसके प्रयोग से वे कुछ ही सेकेंडों में रोग मुक्ति हो गई और वे सब हैरान रह गए। मिरेकल वी वाश में कोई साल्ट या केमिकल नहीं है। यह पवित्र नदियों का अभिमंत्रित औषधीय जल है। इसके प्रयोग करने से स्त्रियों के अन्य रोग अस्थमा, लीवर रोग, किडनी रोग, अर्थराइटिस, हार्ट अटैक आदि भी समाप्त हो जाते हैं। भगवान शिव ने कहा है कि जो रोग किसी औषधि से ठीक नहीं होते, वे मां दुर्गा के दैवव्य विज्ञान के प्रारूप से तैयार औषधियों से समाप्त हो जाते हैं और दोबारा नहीं होते। यह एक दिव्य अलौकिक विज्ञान है जिससे करोड़ों भाई-बहन अपने असाध्य दुखों-कष्टों से मुक्त होकर आनंदित जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

भगवान लक्ष्मी नारायण धाम के महामंत्री सुशील वर्मा ‘गुरुदास’ जी ने कहा कि भारत के उप राष्ट्रपति माननीय सी.पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में महाब्रह्मर्षि जगद्‌गुरु कुमार स्वामी जी का स्वागत कर आशीर्वाद ग्रहण किया साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला ने भी परम पूज्य सद्‌गुरुदेव जी का स्वागत किया और आशीर्वाद ग्रहण किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जी ने परम पूज्य सद्‌गुरुदेव जी से अपनी नाड़ी देखने का आग्रह किया तब परम पूज्य सद्‌गुरुदेव जी 2 मिनट में उपराष्ट्रपति जी की सारी बीमारियां बता दीं जिन्हें जानकर उपराष्ट्रपति जी आश्चर्यजनक प्रसन्नता से भर गए तथा उन्होंने भाव विभोर होकर परम पूज्य सद्‌गुरुदेव जी से दिव्य बीज मंत्र पाठ की कृपा ग्रहण की। परम पूज्य सद्‌गुरुदेव जी की पश्चिमी देशों की जनकल्याण यात्रा के दौरान वहां के मूर्धन्य डाक्टरों, वैज्ञानिकों व बुद्धिजीवियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। अमेरिका, इंग्लैंड, लंदन, कनाडा, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में इन्हें अनेकों सम्मानों से नवाजा गया। परम पूज्य सद्‌गुरुदेव जी को ब्रिटिश संसद के उच्च सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में ‘विश्व के सर्वश्रेष्ठ धर्मगुरु व सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक’ का अवार्ड प्रदान किया गया है।

गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर आयोजित प्रभु कृपा दुख निवारण समागम में दैनिक सवेरा के मुख्य संपादक श्री शीतल विज पहुंचे। इसके बाद महाब्रह्मर्षि श्री कुमार स्वामी जी का आर्शीवाद लिया। इस दौरान अलग-अलग पार्टियों के नेतागण उपस्थित रहे।

 

 

 

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