मानसा: पंजाब में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मानसा सब-डिवीजन के डीएसपी हरजिंदर गिल और ड्रग इंस्पेक्टर नीरज को निलंबित कर दिया है। इस हत्याकांड की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े सबूतों और घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की एक विशेष टीम मंगलवार रात मानसा पुलिस थाने पहुंची और मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेजों तथा जब्त किए गए सामान को अपने कब्जे में लिया। एक वरिष्ठ डीआईजी के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों, ड्रग कंट्रोल अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है। हालांकि, डीएसपी और ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित किए जाने के पीछे के विस्तृत कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है। मामले में जांच जारी है।
चंडीगढ़ PGI में विशेषज्ञों की टीम करेगी पोस्टमार्टम
परविंदर सिंह झोटा के शव का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष टीम करेगी। इसके साथ ही, घटना से संबंधित इनक्वेस्ट यानी मौत की परिस्थितियों की शुरुआती कानूनी जांच भी चंडीगढ़ में मजिस्ट्रेट की निगरानी में पूरी की जाएगी।पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच से घटना से जुड़े अहम तथ्यों को समझने में मदद मिल सकती है।
क्या है परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड?
परविंदर सिंह झोटा मानसा और आसपास के इलाकों में मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित और नशे की लत लगाने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे। शुरुआती एफआईआर और सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, उनका एक केमिस्ट के साथ नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री को लेकर विवाद हुआ था।
आरोप है कि मेडिकल स्टोर के मालिक अश्विनी कुमार ने झोटा पर नजदीक से गोली चलाई थी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया था। अब सीबीआई इस हत्याकांड की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
जांच में सामने आए तथ्यों पर रहेगी नजर
इस मामले में दो अधिकारियों का निलंबन, सीबीआई की जांच और विशेषज्ञों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम की कार्रवाई अहम घटनाक्रम हैं। जांच एजेंसी अब उपलब्ध दस्तावेजों, जब्त सामान, फोरेंसिक साक्ष्यों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की पड़ताल करेगी। फिलहाल, हत्या के मामले में आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

