रूपनगर : रोपड़ हेडवर्क्स से आगे सतलुज नदी में खनन को लेकर विवाद गहरा गया है। बुधवार को खनन शुरू होने के पहले ही दिन करीब 250 टिप्पर रेत निकाले जाने का दावा करते हुए किसान संगठनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खनन स्थल को बलाचौर क्षेत्र का बताया जा रहा है, लेकिन यहां से निकलने वाला मटीरियल रोपड़ बाईपास और आईआईटी रोपड़ के सामने से गुजर रहा है।
पहले से खस्ताहाल सड़क पर भारी टिप्परों की आवाजाही से स्थानीय लोग परेशान हैं। भारतीय किसान यूनियन बहिरामके के जिला अध्यक्ष अवतार सिंह, उपाध्यक्ष कर्णवीर सिंह, किसान नेता बचित्तर सिंह जटाणा सहित अन्य किसान नेताओं ने मौके पर पहुंचकर खनन गतिविधियों पर सवाल उठाए। पंजाब सांझीवालता दल के रूपनगर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार गौरव राणा भी अपने साथियों सहित मौके पर पहुंचे।
किसान नेताओं ने सवाल किया कि जब संबंधित रूट पर धारा 188 लागू होने की बात कही जा रही है, तो फिर भारी टिप्परों से मटीरियल की निकासी कैसे हो रही है। खनन की मंजूरी किस विभाग या अधिकारी ने दी, कितने क्षेत्र में दी गई और मटीरियल निकालने के लिए कौन-सा रूट निर्धारित किया गया है।
संगठनों ने मांग की कि खनन स्थल का साइट प्लान, मंजूर क्षेत्र, अनुमति संबंधी दस्तावेज और निकासी रूट सार्वजनिक किया जाए। किसान नेताओं ने नदी में बांध बनाकर पानी का प्राकृतिक बहाव मोड़ने के आरोपों की जांच की मांग भी की। उन्होंने कहा कि पहले से टूटी सड़क पर भारी वाहनों का बोझ बढ़ने और नदी में बड़े स्तर पर खनन होने के मामले को प्रशासन नजरअंदाज नहीं कर सकता।
किसान नेताओं के अनुसार, खनन विभाग के एसडीओ, जेई और पुलिस अधिकारियों को फोन कर मौके पर बुलाया गया, लेकिन कोई भी अधिकारी स्थिति स्पष्ट करने नहीं पहुंचा। नेताओं ने सवाल उठाया कि जब खनन को लेकर इतने गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहे।
प्रशासन की ओर से जवाब नहीं मिलने के चलते किसान संगठनों ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे दोबारा बैठक बुलाकर अगली रणनीति तय करने का ऐलान किया है। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि खनन की मंजूरियों, सड़क पर टिप्परों की आवाजाही और मटीरियल निकासी के रूट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो संघर्ष तेज किया जाएगा।

