Punjab Wheat Procurement Rules : पंजाब और चंडीगढ़ के किसानों के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद में महत्वपूर्ण ढील दी है। इस फैसले को मौसमी खराबी से प्रभावित फसल की खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस संबंध में केंद्र की ओर से एक आधिकारिक पत्र भी जारी किया गया है।
लस्टर लॉस गेहूं पर बड़ी राहत
नए प्रावधानों के तहत अब चमक खो चुके यानी ‘लस्टर लॉस’ गेहूं पर 70% तक की छूट लागू की गई है। इसका उद्देश्य उन फसलों को भी खरीद प्रक्रिया में शामिल करना है, जो मौसम की मार के कारण अपनी गुणवत्ता खो चुकी हैं।
टूटे और सिकुड़े दानों के मानक बढ़े
सरकार ने टूटे और सिकुड़े हुए दानों की स्वीकार्य सीमा को भी बढ़ा दिया है। पहले यह सीमा 6 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उन किसानों को सीधा लाभ मिलेगा जिनकी फसल बारिश या नमी के कारण प्रभावित हुई है। हालांकि, क्षतिग्रस्त और आंशिक रूप से खराब दानों के लिए पुराना मानक यानी 6 प्रतिशत की सीमा ही लागू रहेगी।
अलग भंडारण और निगरानी व्यवस्था
केंद्र ने स्पष्ट किया है कि रियायती मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को सामान्य स्टॉक से अलग रखा जाएगा। साथ ही इसके रखरखाव और गुणवत्ता की पूरी ट्रैकिंग अनिवार्य होगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
राज्य सरकारों की जिम्मेदारी तय
पत्र में यह भी कहा गया है कि भंडारण के दौरान यदि गेहूं की गुणवत्ता में गिरावट आती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी। साथ ही इस नीति से जुड़े किसी भी वित्तीय या संचालन संबंधी प्रभाव का भार भी राज्य सरकारों पर ही रहेगा।
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किसानों को राहत की उम्मीद
इस निर्णय के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मंडियों में अटका पड़ा गेहूं तेजी से खरीदा जाएगा। इससे किसानों को राहत मिलेगी और खरीद प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।