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सेवा को बनाया जीवन का मिशन, 26 साल से मोगा की बेसहारा गायों की देखभाल कर रहे Manoj Arora

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मोगा: आज के दौर में जहां अधिकांश लोग अपनी निजी व्यस्तताओं में उलझे हुए हैं, वहीं मोगा निवासी मनोज अरोड़ा पिछले 26 वर्षों से निस्वार्थ भाव से बीमार, घायल और बेसहारा गायों की सेवा में जुटे हुए हैं। महेश मुनी गौशाला से जुड़े मनोज अरोड़ा का कहना है कि उनके लिए गौसेवा किसी प्रचार या प्रसिद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य है।

बातचीत के दौरान मनोज अरोड़ा ने बताया कि उनके पिता भी गौमाता और पक्षियों की सेवा किया करते थे। उन्हें देखकर ही उनके मन में सेवा का भाव पैदा हुआ और वे गौशाला से जुड़ गए। समय के साथ जब घायल और बीमार गायों की सूचना मिलने लगी तो सबसे बड़ी समस्या उन्हें मौके से गौशाला तक लाने की थी।

इस समस्या के समाधान के लिए करीब 15 वर्ष पहले मोगा के लोगों और गौभक्तों के सहयोग से एक गौ एम्बुलेंस तैयार करवाई गई। यह एम्बुलेंस आज भी पूरी तरह निःशुल्क सेवा दे रही है। घायल गायों को मौके से लाना, उनका उपचार करवाना और उन्हें सुरक्षित गौशाला तक पहुंचाना पूरी प्रक्रिया बिना किसी शुल्क के की जाती है।

गायों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मोगा के लोगों के सहयोग से एक विशेष गौशाला भी बनाई गई, जहां घायल और बेसहारा पशुओं की देखभाल की जाती है। यहां एम्बुलेंस, इलाज, दवाइयां और रहने की सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। दुर्घटनाओं में टांगें टूट जाने वाली गायों के लिए अलग शेड बनाया गया है, ताकि वे सुरक्षित रह सकें और अन्य पशुओं से उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे।

अत्याचार न करें, एक फोन करें

मनोज अरोड़ा ने समाज से भावुक अपील करते हुए कहा कि कई बार लोग चारा खाने के लिए घर या खेत में आने वाली गायों के साथ क्रूरता करते हैं। कुछ मामलों में पशुओं पर तेजाब तक फेंक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई गाय किसी के घर या खेत में आ जाए तो उसके साथ अत्याचार करने के बजाय उन्हें एक फोन किया जाए। उनकी टीम स्वयं मौके पर पहुंचकर गाय को गौशाला ले जाएगी।

इस दौरान मनोज अरोड़ा भावुक हो गए और आंखों में आंसू लिए कहा कि वे गाय को मां का दर्जा देते हैं और मां के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने लोगों से गौमाता का सम्मान करने और बेसहारा पशुओं की सेवा के लिए आगे आने की अपील की।

उन्होंने बताया कि किसी घायल या बीमार गाय की सूचना मिलने पर सबसे पहले उसके उपचार की व्यवस्था की जाती है। नंदी हो या गाय, हर बेसहारा पशु की सेवा बिना किसी भेदभाव के की जाती है।

कोरोना काल में भी जारी रही सेवा

मनोज अरोड़ा ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान भी उनकी टीम ने शहर में जाकर घायल और बीमार गायों का इलाज जारी रखा। जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों को साथ लेकर दवाइयां, मरहम-पट्टी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई गई। इस दौरान जरूरतमंद लोगों के लिए पैरासिटामोल और दर्द निवारक दवाइयों की व्यवस्था भी की गई।

वर्तमान में गौशाला में करीब 150 गायों और बछड़ों की देखभाल की जा रही है। जो गायें पूरी तरह स्वस्थ हो जाती हैं, उन्हें अन्य गौशालाओं में भेज दिया जाता है। फरीदकोट सहित पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से घायल गायों को उपचार के लिए यहां लाया जाता है।

मनोज अरोड़ा का कहना है कि पंजाब ही नहीं, देश के किसी भी हिस्से में यदि कोई गाय घायल या बीमार है तो लोग उनसे संपर्क कर सकते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में उनके सहयोगी सेवा के लिए मौजूद हैं और जरूरतमंद पशुओं की मदद निःशुल्क की जाती है।

सेवा में विश्वास, चंदे से दूरी

गायों पर हो रहे अत्याचार को लेकर मनोज अरोड़ा ने कहा कि दुनिया में पाप और पुण्य दोनों साथ-साथ चलते हैं। उनका मानना है कि उनका कर्तव्य केवल सेवा करना है और कर्म का फल भगवान स्वयं देते हैं।

अपने परिवार और आजीविका के बारे में उन्होंने बताया कि उनका छोटा-सा डिस्पोजेबल सामान का कारोबार है, जिससे परिवार का खर्च चलता है। उनका बेटा कनाडा में बस चुका है, जबकि बेटी का विवाह भी अच्छे परिवार में हो चुका है। वे इसे गौमाता की कृपा मानते हैं।

दवाइयों और इलाज के खर्च को लेकर मनोज अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने आज तक किसी से चंदा नहीं मांगा। न वे सोशल मीडिया पर पैसों की अपील करते हैं और न ही किसी से आर्थिक सहायता मांगते हैं। वे केवल सोशल मीडिया पोस्ट या स्टेटस के माध्यम से गौमाता की जरूरतों की जानकारी साझा करते हैं। इसके बाद गौभक्त स्वयं आगे आकर दवाइयों, इलाज और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कर देते हैं।

उनका कहना है कि सेवा के लिए दिखावे की जरूरत नहीं होती। यदि भावना सच्ची हो तो समाज अपने आप साथ खड़ा हो जाता है। पिछले 26 वर्षों से घायल और बेसहारा पशुओं की सेवा में जुटे मनोज अरोड़ा की यही निस्वार्थ भावना उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी हुई है।

📍 Location: मोगा

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