जंडियाला : पंजाब के लोक निर्माण मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने लोगों से अपील की है कि वे नशों के पूर्ण खात्मे के लिए पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पंचायत और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक
लोक निर्माण मंत्री ने जंडियाला गुरु के ओलीव गार्डन में ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ फेज-2 के तहत विधानसभा क्षेत्र के सरपंचों, पंचों, चेयरमैनों, पार्षदों, जिला परिषद सदस्यों, ब्लॉक प्रधानों, ब्लॉक समिति सदस्यों, गांव एवं वार्ड डिफेंस कमेटियों के सदस्यों तथा नशा मुक्ति मोर्चा के स्वयंसेवकों के साथ बैठक की।
इस दौरान उन्होंने नशे की रोकथाम और नशा मुक्ति अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने को लेकर चर्चा की।
नशा गंभीर सामाजिक बुराई: हरभजन सिंह ईटीओ
बैठक को संबोधित करते हुए हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि नशा एक गंभीर सामाजिक बुराई है और इसके पूर्ण खात्मे के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर प्रयास करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार नशा तस्करी पर रोक लगाने के साथ-साथ नशे की चपेट में आए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है।
तस्करों पर कार्रवाई के साथ नशा पीड़ितों के इलाज पर जोर
मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही नशा पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को नशे की तस्करी या इससे जुड़ी किसी गतिविधि के बारे में जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या पुलिस को दी जाए।
डिफेंस कमेटियां और स्थानीय प्रतिनिधि निभाएं अहम भूमिका
हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि गांवों और शहरी वार्डों में गठित डिफेंस कमेटियां, पंचायत प्रतिनिधि, पार्षद, सामाजिक संस्थाएं और नशा मुक्ति मोर्चा के स्वयंसेवक नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं को खेल, शिक्षा और रोजगार से जोड़कर उन्हें नशे से दूर रखने के प्रयास किए जाने चाहिए।
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि पंजाब के युवा राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्हें नशे से दूर रखने के लिए परिवारों, शिक्षकों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।

