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शहादत की धरती से निकला मीरी-पीरी खालसा मार्च

Miri-Piri Khalsa March: From Martyrdom : अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसा मार्च श्री चमकौर साहिब में रात्रि विश्राम के बाद आज धार्मिक परंपराओं और खालसाई जोश के साथ गुरुद्वारा श्री भट्टा साहिब, रोपड़ के लिए रवाना हुआ।

इस दौरान ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने संगत को श्री चमकौर साहिब की महान शहादतों से प्रेरणा लेने और गुरु ग्रंथ साहिब, गुरु पंथ व श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति निष्ठा मजबूत करने का संदेश दिया। मार्ग में संगत ने भव्य स्वागत, लंगर और सजावटी गेट लगाकर मार्च के प्रति श्रद्धा प्रकट की। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि यह श्री चमकौर साहिब की धरती है, जहाँ खालसा ने दुनिया के सामने बेमिसाल बहादुरी, सच्चाई और शहादत की मिसाल पेश की। यहाँ, दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खुद अपने बेटों को युद्ध के लिए भेजा और उनके शहीद होने पर खुशी मनाई। इसी धरती पर, गुरु के 40 सिखों ने गुरु साहिब का आदेश मानकर 10 लाख की सेना का मुकाबला किया।

ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने कहा कि आज के युवाओं को शहीदों की इस पवित्र धरती से प्रेरणा लेने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुआ मीरी-पीरी खालसा मार्च सिख सिद्धांतों का प्रचार करने के साथ-साथ उन युवाओं को भी अपनी विरासत से जोड़ने की कोशिश कर रहा है जो सिख धर्म से दूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हमें श्री चमकौर साहिब के किले से प्रेरणा लेने की ज़रूरत है कि चाहे मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हमें गुरु का सहारा है और हमारा संकल्प पक्का है, तो कोई भी ताकत हमें हरा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि एक सिख की निष्ठा श्री गुरु ग्रंथ साहिब, गुरु पंथ और श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति होनी चाहिए।

उन्होंने संगत को ‘बानी-बाना’ से जुड़ने और गुरमत का अनुयायी बनने के लिए भी प्रेरित किया। मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान, संगत ने कई जगहों पर भव्य स्वागत किया और गुरु साहिब के प्रति सम्मान प्रकट किया। रास्ते में संगत ने सजावटी गेट बनाए और तरह-तरह के व्यंजनों के लंगर भी लगाए। खालसा मार्च के साथ चल रही उस बस को लेकर भी संगत में भारी उत्साह था, जिसमें गुरुओं के ऐतिहासिक शस्त्र रखे हुए थे।  इस मौके पर SGPC की सदस्य बीबी हरजिंदर कौर, सदस्य एस. अजमेर सिंह खेरा, एस. परमजीत सिंह लाखेवाल, हल्का इंचार्ज एस. मनमोहन सिंह संधू, SGPC के अतिरिक्त सचिव एस. भगवंत सिंह धनगेरा, एस. इंदरजीत सिंह हैप्पी, बाबा सतनाम सिंह, बाबा गुरमेल सिंह, बाबा बलदेव सिंह मुस्तफापुर, बाबा कुलविंदर सिंह, एस. अमृतपाल सिंह रायपुर, मुख्य ग्रंथी भाई जसबीर सिंह, मुख्य प्रचारक भाई जगदेव सिंह, भाई बलदेव सिंह मोहाली, इंचार्ज एस. गुरभाग सिंह, एस. गुरविंदर सिंह मोहाली, प्रचारक भाई जीवनजीत सिंह, भाई लखविंदर सिंह, भाई सरबजीत सिंह और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। intro and shrt heading

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