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बिना फीस रोइंग सिखा रहे कोच जसबीर, मोगा से तैयार हो रहे राष्ट्रीय खिलाड़ी

Moga Coach Dreams of Taking Rowers to Olympics : मोगा। गांव ढुडीके निवासी पूर्व अंतरराष्ट्रीय रोइंग खिलाड़ी एवं कोच जसबीर सिंह पिछले करीब आठ वर्षों से बच्चों और युवाओं को निशुल्क रोइंग प्रशिक्षण दे रहे हैं। बधनी कलां नहर स्थित उनके केंद्र से अब तक करीब 45 से 48 राष्ट्रीय स्तर के वाटर स्पोर्ट्स खिलाड़ी तैयार होने का दावा है। संसाधनों की कमी के बावजूद यहां प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों का सपना एशियाई स्तर पर पदक जीतने के साथ ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना है।

बधनी कलां नहर पर चल रहे उनके प्रशिक्षण केंद्र में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है। कोच का दावा है कि उनके केंद्र से अब तक वाटर स्पोर्ट्स के करीब 45 से 48 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो चुके हैं, जबकि कई खिलाड़ी विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीत चुके हैं। एशिया और ओलंपिक तक पहुंचाने का सपना कोच जसबीर सिंह ने बताया कि वह खुद एशियाई स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने कोचिंग शुरू की। विदेश से वापस आने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि पंजाब में रोइंग को बढ़ावा देने के लिए अधिक प्रशिक्षण केंद्रों की जरूरत है।

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इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने स्तर पर मोगा में यह केंद्र शुरू किया। उनका कहना है कि यदि खिलाड़ियों को बेहतर नाव, प्रशिक्षण, डाइट और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हों तो पंजाब के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। पहले तैराकी, फिर रोइंग की ट्रेनिंग जसबीर सिंह ने बताया कि रोइंग में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए नए खिलाड़ियों को नाव पर उतारने से पहले तैराकी सिखाई जाती है। शुरुआत में गांव के पूर्व सरपंच जगदीप सिंह गैरी की ओर से स्वीमिंग पूल निशुल्क उपलब्ध करवाया गया, जहां बच्चों को तैराकी का प्रशिक्षण दिया गया।

तैराकी सीखने के बाद ही खिलाड़ियों को रोइंग की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि नाव पलटने जैसी स्थिति में वे अपनी सुरक्षा कर सकें। महंगे उपकरण बड़ी समस्या कोच ने बताया कि रोइंग की नावें और अन्य उपकरण काफी महंगे हैं। एक नाव की कीमत लाखों रुपये से शुरू होकर उसकी गुणवत्ता और प्रकार के अनुसार कई लाख रुपये तक पहुंच जाती है। पंजाब में उपकरणों की उपलब्धता भी सीमित है। इसके चलते खिलाड़ियों को कई बार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में प्रशिक्षण व कैंप के लिए जाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि पंजाब में कम से कम 12 से 15 रोइंग सेंटर होने चाहिए, ताकि दो-तीन जिलों के लिए एक केंद्र उपलब्ध हो और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े। अपने स्तर पर चला रहे प्रशिक्षण केंद्र जसबीर सिंह ने बताया कि वह बच्चों से प्रशिक्षण की कोई फीस नहीं लेते। केंद्र के लिए नावें और अन्य सामान रिश्तेदारों, दोस्तों, एनआरआई सहयोगियों तथा कुछ विद्यार्थियों की मदद से जुटाया गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अब इस केंद्र को सरकारी स्तर पर संभाला जाए और खिलाड़ियों के लिए जरूरी उपकरण, सुविधाएं तथा कोच उपलब्ध करवाए जाएं। स्कूल स्तर से रोइंग को बढ़ावा देने की मांग उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चों को रोइंग खेल के बारे में जानकारी ही नहीं है।

रोइंग को स्कूल खेलों से जोड़ा जाना चाहिए। जहां पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां इंडोर रोइंग मशीनों के माध्यम से बच्चों को इस खेल से जोड़ा जा सकता है। इससे खेल का आधार मजबूत होगा और नए खिलाड़ी तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि खेलों से जुड़ने से बच्चों को नशे और मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से दूर रखने में भी मदद मिल सकती है। खिलाड़ियों ने भी बताई अपनी परेशानी रोइंग खिलाड़ी मानवजीत सिंह ने बताया कि वह करीब दो वर्षों से इस खेल से जुड़े हैं।

इस दौरान वह दो बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर और दो बार नेशनल गेम्स में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की ओर से बेहतर नावें और अन्य सुविधाएं मिलें तो खिलाड़ी और अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। खिलाड़ी प्रभजोत कौर ने बताया कि वह करीब पांच-छह वर्षों से रोइंग कर रही हैं। कोच ने पहले उन्हें तैराकी सिखाई और इसके बाद रोइंग का प्रशिक्षण दिया। वह राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं और पदक भी जीत चुकी हैं। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की संख्या के मुकाबले केंद्र में नावें कम हैं, जिसके कारण प्रशिक्षण में अधिक समय लगता है। उन्होंने सरकार से नई नावें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की।

ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने की चाह खिलाड़ियों ने कहा कि उनका सपना एशियाई स्तर पर पदक जीतने के साथ ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करना है। कोच जसबीर सिंह का कहना है कि यदि पंजाब में रोइंग केंद्रों को आधुनिक उपकरण, बेहतर कोचिंग, डाइट और अन्य जरूरी सुविधाएं मिलें तो यहां के खिलाड़ी बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं। उन्होंने सरकार से मोगा सहित पंजाब के अन्य रोइंग केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और खिलाड़ियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की अपील की।

 

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