Last Updated: September 21, 2026

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मोगा के हरमीत सिंह ने पैदल तय किया 40 हजार किमी का सफर, 23 रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम, अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर

September 20, 2026

मोगा के हरमीत सिंह ने पैदल तय किया 40 हजार किमी का सफर, 23 रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम, अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर

मोगा: आमतौर पर लोग स्वस्थ रहने के लिए सैर, कसरत या खेलों का सहारा लेते हैं, लेकिन मोगा जिले के गांव बधनी कलां के हरमीत सिंह के लिए पैदल चलना धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया। कभी रोजमर्रा के कामकाज के दौरान कुछ किलोमीटर पैदल चलने वाले हरमीत सिंह आज अपने अनुसार करीब 40 हजार किलोमीटर से अधिक का सफर पैदल तय कर चुके हैं। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफर किसी रिकॉर्ड को बनाने के लक्ष्य के साथ शुरू नहीं किया था। लगातार चलते रहे और करोड़ों कदमों का यह सफर उन्हें अलग-अलग रिकॉर्ड बुक तक ले गया।

कब शुरू हुआ पैदल चलने का सफर

हरमीत सिंह के अनुसार वह खेतीबाड़ी से जुड़े हुए हैं और पहले कबड्डी भी खेलते रहे हैं। वर्ष 2013-14 के दौरान जालंधर में कबड्डी कैंप में रहते हुए उन्होंने नियमित रनिंग और शारीरिक कसरत की। इसी दौरान शरीर को अधिक चलने और मेहनत करने की आदत बनी। वर्ष 2015-16 के करीब उन्होंने मोबाइल में हेल्थ एप डाउनलोड की। शुरुआत में उन्होंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया कि रोजाना कितने कदम चलते हैं।

बाद में जब उन्होंने एप में दर्ज कदमों की संख्या देखी तो यह संख्या करोड़ों तक पहुंच चुकी थी। इसके बाद उन्हें अपने इस सफर को रिकॉर्ड के रूप में दर्ज करवाने का विचार आया। 18 अक्टूबर 2019 से उन्होंने अपने पैदल सफर का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना शुरू किया। उनके अनुसार 19 सितंबर 2026 तक सवा पांच करोड़ से अधिक कदम दर्ज हो चुके हैं और इस दौरान वह करीब 40 हजार किलोमीटर से अधिक पैदल चल चुके हैं।

23 रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज

हरमीत सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने पैदल चलने से जुड़े रिकॉर्ड अलग-अलग संस्थाओं को भेजे। उनके अनुसार अब तक 23 नेशनल और इंटरनेशनल रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हो चुका है। इसके अलावा करीब 37 रिकॉर्डों के लिए वह आवेदन कर चुके हैं। उनका कहना है कि कुछ संस्थाओं ने उनके रिकॉर्ड को देखते हुए नई कैटेगरी भी शुरू की है। अब हरमीत सिंह ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भी आवेदन किया हुआ है। उनका कहना है कि दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद यदि संस्था की ओर से मान्यता मिलती है तो यह उनके लिए एक और बड़ी उपलब्धि होगी।

शुरुआत में लोग करते थे सवाल, अब बढ़ाते हैं हौसला

हरमीत सिंह बताते हैं कि जब उन्होंने लगातार पैदल चलना शुरू किया तो कई लोग उनसे सवाल करते थे कि वह बिना किसी खास मकसद के इतना क्यों चलते हैं। कई बार लोगों की बातों से उन्हें बुरा भी लगता था, लेकिन उन्होंने अपना सफर जारी रखा। समय के साथ लोगों की सोच बदली। आज वही लोग उन्हें फोन कर हौसला बढ़ाते हैं और जरूरत पड़ने पर मदद की पेशकश भी करते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद उन्हें लोगों से और अधिक प्रोत्साहन मिलने लगा।

किसान होने के साथ समाजसेवा और खेलों से भी जुड़ाव

हरमीत सिंह का कहना है कि पैदल चलने के साथ उन्होंने खेतीबाड़ी और परिवार की जिम्मेदारियों को भी पूरी तरह निभाया। खेती के कई काम वह खुद करते हैं। इसके अलावा वह समाजसेवा और खेल गतिविधियों से भी जुड़े हुए हैं। गांव के स्कूलों में टूर्नामेंट करवाने सहित अन्य सामाजिक कार्यों में भी योगदान देते हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में परिवार के लोग भी पूछते थे कि इतना समय पैदल चलने से क्या हासिल होगा, लेकिन आज उन्हें खुशी है कि उनकी मेहनत देखकर लोग अपने बच्चों को नशे से दूर रहने और खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

युवाओं को नशे से दूर रहकर मैदान से जुड़ने का संदेश

हरमीत सिंह ने युवाओं से नशे से दूर रहने और खेल मैदान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार कोई न कोई शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। वॉकिंग, रनिंग, साइकिलिंग और खेल जैसी गतिविधियों से युवा अपने समय का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि किसी भी तरह की कसरत अपनी क्षमता के अनुसार ही करनी चाहिए और बिना सही जानकारी या विशेषज्ञ की सलाह के शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए।

विदेश जाने की दौड़ पर भी दिया संदेश

विदेश जाने की होड़ के बारे में हरमीत सिंह ने कहा कि विदेशों में भी संघर्ष कम नहीं है। जो युवा विदेश जा चुके हैं, उनकी अपनी परिस्थितियां और मजबूरियां हो सकती हैं, लेकिन पंजाब में रहकर भी मेहनत, पढ़ाई, खेतीबाड़ी, खेल और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मौजूद हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता पहचानकर मेहनत करने और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ने की अपील की।

अब सपना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का

हरमीत सिंह कहते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि रोजमर्रा की जिंदगी में चलते-चलते उनके कदम एक दिन रिकॉर्ड बुक तक पहुंच जाएंगे। बिना किसी खास लक्ष्य के शुरू हुआ पैदल चलने का यह सफर आज उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। अब उनका सपना अधिक से अधिक रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करवाने के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपनी उपलब्धि दर्ज करवाना है। उनका कहना है कि वह अपनी इस यात्रा के माध्यम से अपने गांव, पंजाब और देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।

📍 Location: मोगा

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