मोगा: जिले में पराली जलाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पंजाब सरकार और जिला प्रशासन की ओर से किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद मोगा शहर के आसपास के क्षेत्रों और धर्मकोट विधानसभा हलके में शाम ढलते ही खेतों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। खेतों में आग लगाए जाने के इन दृश्यों के बीच प्रशासन के दावों और जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली का उचित प्रबंधन करना किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार की ओर से किसानों से अपील की जा रही है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय इसके प्रबंधन के लिए वैकल्पिक तरीकों को अपनाएं। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से भी किसानों को जागरूक करने के लिए बैठकें और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद खेतों में आग लगने की घटनाएं सामने आने से पराली प्रबंधन का मुद्दा फिर सुर्खियों में है।
जिले में पराली जलाने का एक मामला सामने आया: एडीसी
पराली जलाने के मामले को लेकर जब अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) जसपिंदर सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि फिलहाल मोगा जिले में पराली जलाने का केवल एक मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर आग लगने की जो घटनाएं सामने आई थीं, प्रशासन की ओर से उनकी जांच की गई है। उनके अनुसार, इनमें से कुछ घटनाएं पराली जलाने की नहीं, बल्कि कूड़े-कचरे में आग लगने की थीं।
एडीसी ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से समय-समय पर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए जागरूकता सेमिनार भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि किसान पराली का उचित प्रबंधन करें और इसे जलाने से बचें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जिले में पराली जलाने के मामले सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
📍 Location: मोगा

