Morcha Announces Indefinite Protest from December 7 : अमृतसर। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने पंजाब सरकार पर किसानों और खेतिहर मजदूरों से किए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए 7 दिसंबर 2026 से चंडीगढ़ में अनिश्चितकालीन ‘पक्का मोर्चा’ शुरू करने का ऐलान किया है।
चंडीगढ़ के किसान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मोर्चे के नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ प्रदर्शन किया जाएगा। मोर्चे की प्रमुख मांगों में बासमती, मूंग, मक्का, सरसों और आलू की सरकारी खरीद की गारंटी, C2+50% फॉर्मूले के आधार पर कीमतें, किसानों व मजदूरों की कर्जमाफी, संशोधित भूमि पूलिंग नीति वापस लेना, नदी जल विवाद का समाधान और किसानों पर दर्ज मामले रद्द करना शामिल हैं। इसके अलावा, मुक्त व्यापार समझौतों और केंद्रीय कानूनों में संशोधनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने तथा भारत-पाकिस्तान व्यापार गलियारा खोलने की मांग भी उठाई गई। नेताओं ने सरकार से 7 दिसंबर से पहले बैठक कर मांगों का ठोस समाधान निकालने की अपील की।
मोर्चे की मुख्य मांगें :
1. पांच फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी और ‘C2+50%’ फॉर्मूले के आधार पर कीमतें: पंजाब सरकार को मंडियों में पांच फसलों—बासमती, मूंग, मक्का, सरसों और आलू—की खरीद की गारंटी देनी चाहिए, और इन फसलों की कीमतें स्वामीनाथन आयोग के ‘C2+50%’ फॉर्मूले के अनुसार तय की जानी चाहिए। भगवंत मान सरकार 23 फसलों की खरीद की गारंटी देने का वादा करके सत्ता में आई थी। एक बैठक के दौरान, सरकार ने बासमती की खरीद से जुड़े मुद्दे को सुलझाने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह वादा भी पूरा नहीं हुआ है।
2. किसानों और खेतिहर मजदूरों का कर्ज माफ करना: किसानों और खेतिहर मजदूरों को कर्ज मुक्त किया जाना चाहिए। जब तक कर्ज माफ नहीं हो जाता, तब तक सहकारी बैंकों और भूमि बंधक बैंकों सहित सभी संबंधित ऋणों के लिए ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ (OTS) योजना लागू की जानी चाहिए। कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों और मजदूरों के परिवारों को—वादे के अनुसार—पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।
3. संशोधित भूमि पूलिंग नीति वापस लें: पंजाब सरकार द्वारा लागू की गई संशोधित भूमि पूलिंग नीति को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए।
4. ‘रिपेरियन सिद्धांत’ (नदी जल अधिकारों से संबंधित सिद्धांत) के अनुसार पंजाब के नदी जल के मुद्दे का समाधान करें: पंजाब के जल संबंधी मुद्दे को ‘रिपेरियन सिद्धांत’ के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए। संविधान की धारा 78, 79 और 80 को निरस्त किया जाना चाहिए और पंजाब को अपने जल संसाधनों पर अधिकार मिलना चाहिए।
5. किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लें: किसानों और किसान नेताओं के खिलाफ दर्ज सभी मामले—जिनमें पराली जलाने से जुड़े मामले भी शामिल हैं—वापस लिए जाने चाहिए। शंभू और खनौरी प्रदर्शन स्थलों से जुड़े मुद्दों का पूरी तरह से समाधान किया जाना चाहिए।
6. मुक्त व्यापार समझौतों और केंद्रीय कानूनों में किए गए संशोधनों को रद्द करें: पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए, जिसमें भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते सहित सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग हो। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा ‘बिजली (संशोधन) विधेयक’, ‘बीज अधिनियम’ और सहकारी समितियों से जुड़े कानूनों में किए गए संशोधनों को वापस लेने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किए जाने चाहिए।
7. भारत-पाकिस्तान व्यापार गलियारा खोला जाए: पंजाब विधानसभा में व्यापार गलियारा खोलने के पक्ष में एक प्रस्ताव पेश किया जाना चाहिए, ताकि व्यावसायिक आदान-प्रदान को सुगम बनाया जा सके। ‘किसान मजदूर मोर्चा’ के नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा उनकी मांगें मानने के वादे के बावजूद, अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है। नतीजतन, किसानों और मजदूरों के पास अपने संघर्ष को और तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सरकार को ‘मोर्चे’ (आंदोलन) की निर्धारित तिथि से पहले एक बैठक बुलानी चाहिए और उनकी सभी मांगों का ठोस समाधान सुनिश्चित करना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नेताओं में सरवन सिंह पंढेर और लखविंदर सिंह वरयाम नंगल (किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब), बलवंत सिंह बेहरामके (बीकेयू बेहरामके), बलदेव सिंह जीरा और लखबीर सिंह (बीकेयू क्रांतिकारी), बलकार सिंह बैंस (बीकेएमयू), जंग सिंह पतेरी और गुरध्यान सिंह (बीकेयू पतेरी), मलकीत सिंह गुलामी वाला (किसान मजदूर मोर्चा), गुरमनीत सिंह मंगत (पीएफएफ) शामिल थे। दिलबाग सिंह हरिगढ़ और राज सिंह (बीकेयू आजाद), और किरपाल सिंह (नौजवान सभा, चंडीगढ़)। बीकेयू दोआबा और बीकेयू शहीद भगत सिंह के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

