Last Updated: September 21, 2026

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डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान बनी ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, 2,300 लोगों को मिला कैशलेस इलाज

July 15, 2026

डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान बनी ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’, 2,300 लोगों को मिला कैशलेस इलाज

पंजाब में डायबिटीज मरीजों के लिए मुख्यमंत्री सेहत योजना बड़ी राहत साबित हो रही है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत पिछले छह महीनों में 2,300 डायबिटीज से जुड़े उपचार मामलों को कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन मरीजों के इलाज पर करीब ₹6.5 करोड़ की राशि खर्च की गई है।

डायबिटीज अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि डायबिटीज तेजी से कामकाजी उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर रही है। यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

21 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, डायबिटीज उपचार के सबसे अधिक मामले 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में सामने आए हैं। इस वर्ग के 1,123 मरीजों का इलाज योजना के तहत किया गया। वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र के 809, 17 से 35 वर्ष के 243 और 0 से 16 वर्ष के 125 मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिला।

गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रहे कई मरीज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज की शुरुआत अक्सर सामान्य लक्षणों से होती है, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। बार-बार प्यास लगना, अधिक पेशाब आना, धुंधला दिखाई देना, लगातार थकान और घाव का देर से ठीक होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

कई मरीज इलाज के लिए तब पहुंचते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। आंकड़ों में सामने आया है कि अनियंत्रित ब्लड शुगर के कारण होने वाली डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक इलाज वाली गंभीर स्थिति रही।

डायबिटिक फुट और अन्य जटिलताओं के मामलों में बढ़ोतरी

लंबे समय तक डायबिटीज रहने से नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे डायबिटिक फुट जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। यह उपचार के प्रमुख मामलों में दूसरी बड़ी जटिलता के रूप में सामने आई।

कई मरीजों को डायलिसिस, आईसीयू देखभाल, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, सीटी स्कैन, एमआरआई जांच और डायबिटिक फुट सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं की जरूरत पड़ी।

स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से की नियमित जांच की अपील

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि डायबिटीज के बढ़ते मामले पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित मरीजों में बड़ी संख्या कामकाजी वर्ग की है, जिन पर परिवार और आर्थिक जिम्मेदारियां होती हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डायबिटीज के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करवाते रहें। उनके अनुसार, बीमारी की जटिलताओं का इलाज करने से बेहतर है कि समय रहते इसकी रोकथाम और प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए।

डायबिटीज उपचार से जुड़े प्रमुख आंकड़े

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 21 जुलाई 2026 तक डायबिटीज से जुड़े 2,300 उपचार मामलों को कवर किया गया।

इन उपचारों पर लगभग ₹6.5 करोड़ खर्च किए गए।

36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के मरीजों की संख्या सबसे अधिक 1,123 रही।

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक दर्ज की गई गंभीर स्थिति रही।

डायबिटिक फुट दूसरी प्रमुख जटिलता के रूप में सामने आई।

कई मरीजों को आईसीयू, डायलिसिस, सर्जरी और आधुनिक जांच सुविधाओं की आवश्यकता पड़ी।

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