जालंधर: वरियाणा डंप पर कचरे के प्रबंधन को लेकर नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में गलत जानकारी देने पर एनजीटी सख्त हो गया है। इस मामले में स्थानीय निकाय विभाग ने अपने हैल्थ आफिसर डा. श्री कृष्ण को निलंबित कर दिया है। एनजीटी में इस मामले में सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकत्र्ता तेजस्वी मिन्हास ने केस दायर कर रखा है। नगर निगम पर आरोप है कि ठोस कचर प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट) को लेकर भ्रामक हल्फनामा दाखिल किया था। एनजीटी में दाखिल अपने जवाब में नगर निगम ने दावा किया कि शहर के सभी 85 वार्डो में घर-घर से कम्पार्टमैंटलाइज्ड ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा एकत्रित किया जाता है। इतना ही नहीं कचरे का अलग-अलग किया जाता है।
एनजीटी में निगम ने यह भी दावा किया है कि जालंधर में प्रतिदिन लगभग 500 मीट्रिक टन (एमटीडी) कचरा उत्पन्न होता है। इसमें 250 एमटी गीला और 250 एमटी सूखा कचरा होता है। इसमें से 355 टन प्रतिदिन (टीडीपी) विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे पिट कंपोस्टिंग और ऑर्गैनिक वेस्ट कंपोस्टिंग मशीनों के माध्यम से प्रोसैस किया जा रहा है। तेजस्वी मिन्हास ने नगर निगम के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए हलफनामे को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि स्नेत स्तर पर कचरे को अलग-अलग नहीं किया जाता, नगर निगम के कर्मचारी घर-घर से कचरा एकत्रित नहीं करते। इतना ही नहीं कचरे को बिना ढंके और गैर-कम्पार्टमैंटलाइज्ड वाहनों में ले जाया जाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहर में वास्तविक कचरा उत्पादन लगभग 1000 एमटीडी है, जो निगम द्वारा बताए गए आंकड़े से लगभग दोगुना है। इसमें से केवल 600-700 एमटीडी ही आधिकारिक रूप से संभाला जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, एनजीटी की प्रधान पीठ ने आज इस पर सुनवाई की। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, संबंधित सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डा. कृष्ण को प्रधान सचिव ने निलंबित कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की गई है।

