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11 से नवरात्र शुरू, नारी शक्ति के सम्मान का संदेश देंगे मां दुर्गा के नौ दिन

Navratri Begins October 11, Bringing Nine Days of Devotion : मोगा। मां भगवती की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे हैं। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। पंडित पवन गौतम ने कहा कि नवरात्र केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम, सेवा और अपनी बुराइयों को त्यागने का अवसर भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी सेहत के अनुसार व्रत रखने और नारी शक्ति के सम्मान का संकल्प लेने की अपील की।

नवरात्र का महत्व केवल व्रत रखने और पूजा-पाठ करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्व मनुष्य को आत्मचिंतन करने, अपनी कमजोरियों को पहचानने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा भी देता है। यह विचार पंडित पवन गौतम ने नवरात्र के महत्व को लेकर विशेष बातचीत के दौरान व्यक्त किए। पंडित पवन गौतम ने बताया कि नवरात्र का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष में चार नवरात्र मनाए जाते हैं, जिनमें चैत्र और आश्विन मास के नवरात्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

आश्विन मास में आने वाले शारदीय नवरात्र श्रद्धालुओं के लिए मां दुर्गा की आराधना, साधना और आध्यात्मिक चिंतन का विशेष अवसर होते हैं। इन दिनों में पूजा-पाठ के साथ संयमित जीवनशैली अपनाने और अच्छे विचारों को अपने व्यवहार में शामिल करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि व्रत का वास्तविक उद्देश्य केवल भोजन से परहेज करना नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना, बुरे विचारों से दूर रहना और अपने भीतर की कमियों को पहचानना भी है। श्रद्धालुओं को अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार व्रत रखना चाहिए।

नवरात्र के दौरान सेवा, सिमरन, दान-पुण्य और अच्छे कर्मों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए, ताकि धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी मजबूत किया जा सके। पंडित गौतम ने बताया कि नवरात्र के दौरान कलश स्थापना और अखंड ज्योति प्रज्वलित करने की विशेष परंपरा है। अखंड ज्योति श्रद्धा, विश्वास और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक मानी जाती है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा से श्रद्धालुओं को शक्ति, बुद्धि, धैर्य, साहस और सद्भावना जैसे गुण अपनाने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि नवरात्र का सबसे महत्वपूर्ण संदेश आत्मविश्वास और आत्मचिंतन है।

मां भगवती को शक्ति का प्रतीक माना जाता है और यह पर्व प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अच्छाइयों, क्षमताओं और साहस को पहचानने का अवसर देता है। नवरात्र की भावना नारी शक्ति के सम्मान और समाज में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने का संदेश भी देती है। पंडित पवन गौतम ने देशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन पवित्र दिनों को श्रद्धा, संयम, सेवा और सकारात्मक सोच के साथ मनाना चाहिए। यदि व्यक्ति नौ दिनों के दौरान अपनी बुराइयों को छोड़ने और अच्छे मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है, तो नवरात्र उसके जीवन में नई शुरुआत, मानसिक दृढ़ता और आध्यात्मिक ऊर्जा का माध्यम बन सकते हैं।

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