इस मौके पर बोलते हुए नील गर्ग ने कहा कि भगत सिंह को याद करने का मतलब सिर्फ़ उनकी प्रतिमा पर फूल चढ़ाना नहीं है; असली श्रद्धांजलि उनके विज़न और आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना है। उन्होंने कहा कि भगत सिंह ने कम उम्र में ही अपना जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया और अपने साथी नागरिकों में न केवल आज़ादी, बल्कि न्याय, समानता, शिक्षा, तर्कसंगत सोच और मानवीय गरिमा का विज़न भी जगाया।
नील गर्ग ने कहा कि आज यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि पंजाब की युवा पीढ़ी सिर्फ़ भगत सिंह जी की तस्वीर तक ही सीमित न रहे, बल्कि उनकी विचारधारा, लेखों, शिक्षाओं, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक ज़िम्मेदारी की भावना से जुड़े। उन्होंने कहा, “शहीद कभी मरते नहीं; वे अपने विचारों के ज़रिए हमेशा जीवित रहते हैं। हमारे लिए, भगत सिंह जी इतिहास का सिर्फ़ एक पन्ना नहीं हैं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत और पंजाब की विरासत का एक अहम हिस्सा हैं।”
इस मौके पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय निवासी भी मौजूद थे, जिनमें मनदीप कौर रामगढ़िया (बठिंडा पार्षद और रामगढ़िया वेलफेयर बोर्ड की सीनियर वाइस चेयरपर्सन), रितु सवेरा, सलिल बंसल और मंगल गोयल (ट्री लवर सोसाइटी), नवीन (स्माइल NGO), चमन लाल हैप्पी, नवीन शाह और जीतपाल शर्मा (ज़ोनल इंचार्ज, सनातन सेवा समिति) शामिल थे।
मेष: दिन शुभ रहेगा...