Milk Plants: भारतीय किसान यूनियन ने आज यहां मीडिया को बताया कि पंजाब के सहकारिता विभाग का बहुत बुरा हाल है और इसके बहुत से संस्थान अब घाटे में चल रहे हैं। यूनियन के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि सहकारी विभागों की माड़ी कारगुजारी के बारे में पहले भी सहकारी सभाओं के रजिस्ट्रार को 30 जुलाई 2024 में एक मैमोरेंडम दिया गया था और जांच करवाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई जांच नहीं हुई और कोई कार्रवाई भी नहीं हुई।
मिल्क प्लांट लुधियाना में ऑडिट विभाग ने 1 करोड़ 11 लाख का घपला किया था और कुछ लोगों को जांच के बाद घपले में शामिल पाया गया था, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि एक अधिकारी को इस घपले के संबंध में चाजर्शीट भी किया गया था। इसके बाद मिल्क प्लांट लुधियाना में और भी बहुत से घपले हुए, जिस कारण मिल्क प्लांट लगभग 20 करोड़ के घाटे में चला गया है, यह भारतीय किसान यूनियन का कहना है।
राजेवाल ने कहा कि सहकारिता विभाग, खास करके इसके मिल्कफैड, मार्कफैड जैसे संस्थान किसानों के संस्थान हैं, लेकिन अब इसको अफसर चूना लगाने लगे हैं। छोटे मुलाजमों को हिदायत दी जाती है कि अधिकारियों के घरों में दूध से बने हुए पदार्थ घी वगैहरा भेजा जाए और इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, यह लगभग सभी प्लांटों में चल रहा है। ‘बगार’ के रूप में मिल्क प्लांटों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
राजेवाल ने दोष लगाया है कि लुधियाना में 45 लाख रुपए, मोहाली में 10 लाख रुपए और पटियाला में 30 लाख रुपए का स्टॉक कम मिला है, यह कहां गया? इसकी जांच होनी चाहिए। राजेवाल ने कहा है कि मोहाली मिल्क प्लांट में सॉफ्टवेयर गायब करके 10-12 करोड़ रुपए का घपला हुआ और यह अब बीच में ही लटक रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग को ठीक रास्ते पर लाने के लिए जांच होनी जरूरी है और जो भी अधिकारी घपलों में शामिल पाए गए हैं, उनको नौकरी से बर्खास्त किया जाना जरूरी है।

