पटियाला। “एक देश, एक चुनाव” विषय पर महारानी क्लब, पटियाला में एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की सफल महिला उद्यमियों ने इस ऐतिहासिक चुनावी सुधार पर अपने विचार साझा किए। इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. निधि बंसल द्वारा किया गया, जिसमें भाजपा की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद प्रनीत कौर और भाजपा पंजाब महिला मोर्चा अध्यक्ष जय इंदर कौर मुख्य अतिथि रहीं। इसके अलावा, भाजपा प्रवक्ता एवं इस कार्यक्रम के राज्य संयोजक एस.एस. चन्नी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रनीत कौर ने “एक देश, एक चुनाव” के दीर्घकालिक लाभों पर जोर देते हुए कहा, “बार-बार होने वाले चुनाव प्रशासन और विकास कार्यों में बाधा डालते हैं, क्योंकि सरकारें लगातार चुनावी मोड में रहती हैं और जनहित के कार्यों पर पूरा ध्यान नहीं दे पातीं। एकसमान चुनाव प्रणाली से नीति निर्माण और उनके कार्यान्वयन में सुधार होगा, सरकारी खर्च में कटौती होगी और देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी, जिससे पूरे राष्ट्र को लाभ मिलेगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दूरदर्शी निर्णय की सराहना करते हुए जय इंदर कौर ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा को आगे बढ़ाकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह सुधार न केवल करदाताओं के पैसे की बचत करेगा बल्कि बार-बार चुनावी व्यवधानों को समाप्त कर सरकारों को सुचारू रूप से कार्य करने की सुविधा देगा। भारत को स्थिरता और निरंतरता की आवश्यकता है, और यह पहल हमारे लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगी।”
इस विषय पर अपनी बात रखते हुए भाजपा प्रवक्ता एवं राज्य संयोजक एस.एस. चन्नी ने कहा, “हर वर्ष अलग-अलग चुनाव होने से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, गैर-जरूरी खर्च बढ़ता है और आर्थिक विकास बाधित होता है। यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाएं, तो सरकार की ऊर्जा चुनाव प्रबंधन के बजाय विकास कार्यों में लगाई जा सकेगी। साथ ही, यह सुधार लोकतंत्र को और मजबूत करेगा, जिससे मतदाता जागरूकता और भागीदारी भी बढ़ेगी।”
इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद थीं, जिनमें समाजसेवी सतिंदरपाल कौर वालिया, महारानी क्लब के अध्यक्ष दीपक कामपानी, भाजपा पटियाला अर्बन अध्यक्ष विजय कूका, भाजपा पटियाला अर्बन उपाध्यक्ष हरदेव सिंह बाली और वरिष्ठ पत्रकार राजेश पंजोला शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में महिला उद्यमियों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के साथ एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सभी ने “एक देश, एक चुनाव” के विचार का पुरजोर समर्थन किया। सभी ने इस सुधार को भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में अधिक पारदर्शिता, दक्षता और प्रगति लाने वाला कदम बताया।